रामानुज मठ, गया ( बिहार) से लापता लड़के को भरथरी साधू बनाये जाते हैं । –समाचार के शेष भाग यहां से पढ़िए :-…….

KRANTI NEWS BIHAR , (कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह ):- गया स्थित रामानुज मठ के संत श्री देवनारायण आचार्य के पिता का नाम बुदधसैन उपाध्याय है।वे गांव-कर ईया म ई, थाना-उधैती, जिला-बदायूं(उत्तर प्रदेश) के निवासी माने जाते हैं । इनके संबंध में ,जब मैं रामानुज मठ, गया के महंत श्री राघवाचार्य से पूछा कि अवध सिंह और दिलीप सिंह को देव नारायण आचार्य जी अपने साथ इस मठ से ले गए थे, लेकिन वे दोनों एक महीना के बाद भी नहीं आते हैं।उन दोनों के कोई पत्र भी नहीं आई है । और नहीं इस संबंध में देव नारायण आचार्य जी का कोई पत्र मिला है । आखिर आप बताइए कि श्री देवनारायण आचार्य जी वर्तमान में कहां रहते हैं ? इस प्रश्न के उत्तर में स्वामी राघवाचार्य जी ने मेरे सामने डर से कांपते हुए बताये थे कि मुझे नहीं मालूम कि देश नारायण आचार्य कौन है? इस मठ में अनेक साधू -संत आते-जाते रहते हैं । इसलिए सबको जानकारी रखना मुश्किल होता है । इस बात पर मैंने उनसे कहा कि आने- जाने वाले साधु तो चार-पांच दिन रहते हैं और चले जाते हैं । लेकिन देव नारायण आचार्य जी को तो मैं लगभग दो महीने से आपके साथ में रहते हुए देखा हूं, फिर भी आपको उनके बारे में जानकारी क्यों नहीं है? आप झुठ बोल रहे हैं । आप साफ-साफ बताइए नहीं तो आपके खिलाफ थाने में केस दर्ज कराउंगा । इस बात पर स्वामी राघवाचार्य कांपते हुए अपने कमरे में रखे किताबों के बीच से एक “अनंत संदेश’ मासिक पत्रिका निकालकर मुझे दिखाये, जिसके संपादक पं. केशव देव शास्त्री जी हैं । प्रधान संपादक आचार्य नरेश नारायण जी हैं ।यह पत्रिका श्री रंगनाथ प्रेस ,विरिनंदा वन( मथुरा) से निकलती है । इस पत्रिका में स्वामी राघवाचार्य जी ने अपने वचाव के लिए विशेष- सूचना प्रकाशित करवाये, जो निम्नलिखित हैं-विशेष-सूचना…..
जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य जी महाराज गया पीठाधीश्वर के नेतरितव में दिनांक-21/4/98 को श्री तिरदंडीदेव सेवाश्रम शिविर हरिद्वार में एक बैठक हुई, जिसमें काफी संख्या में महंत, संतों एवं भक्तगणों की उपस्थिति रही। बैठक में शिविर के विकास एवं अन्य विषयों पर चर्चा हुई। अंत में यह निर्णय लिया गया कि रामानुज मठ,गया पर उतराधिकारी के रूप में देवनारायण आचार्य का किसी प्रकार का भी अधिकार नहीं रहा,न है,न रहेगा । अनंत संदेश’ पत्रिका के माध्यम से यह समाचार देना अनिवार्य इसलिए हो गया था कि भक्तों में गलत संदेश देकर भ्रम पैदा कुछ लोग करना चाहते थे। अतः अब स्पष्ट जानें इस आशय का निम्न पत्र भी है।—ज०गु० राघवाचार्य, रामानुज मठ, गया ( बिहार)………………..
यह सूचना अनंत संदेश ‘मासिक पत्रिका, मथुरा से निकाली गई थी जिसके प्रधान संपादक श्री नरेश नारायण आचार्य जी हैं । इसके बाद मैंने यह पत्रिका उनसे छीन लिया और बोला कि आप पर कानून कारवाई किया जायेगा । ऐसा करने से आप सच पर पर्दा नहीं डाल सकते हैं । आप साधू के भेष में रावण जैसे पाखंडी बाबा हैं । आपको मैं छोड़ूंगा नहीं । आप थोड़ा इंतजार कीजिए । आपके पाप के भरे हुए घड़ा जल्दी ही फुटेगा । इतना कहकर मैं वहां से निकल गया। इस समाचार का शेष भाग अभी बाकी है । इस समाचार का विशेष बात अगले भाग में पढ़िए ।

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