रामानुज मठ , गया (बिहार) से लापता लड़के को भरथरी साधू बनाये जाते हैं ।

KRANTI NEWS BIHAR , ( कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह के द्वारा) :- गया (बिहार),फलगू नदी के किनारे सूर्य कुंड के पास स्थित रामानुज मठ, गया (बिहार) के मठाधीश स्वामी राघवेन्दराचारय के साथ स्वामी देव नारायण आचार्य रहते थे । वर्तमान समय में स्वामी राघवेन्द्र आचार्य जीवित नहीं हैं ।वे लगभग चार साल पहले स्वर्गवास सिधार चुके हैं । उनके समय में श्री देवनारायण आचार्य नाम के संत रामानुज मठ, गया में रहते थे।उस समय करसिली मुहल्ला, विष्णु पत मंदिर के सामने गया (बिहार) में किशन लाल भैया,पंडाजी के मकान में स्वर्गीय जंगबहादुर सिंह अपनी पत्नी एवं दो लड़के के साथ रहते थे। एक लड़का का नाम अवध सिंह और दूसरे लड़के का नाम दिलीप सिंह हैं ।उस समय अवध सिंह अनुग्रह नारायण कालेज, गया से वारहवी ,जीव विज्ञान से पास किया था और छोटे सहोदर भाई दिलीप सिंह दसवीं में पढ़ रहा था ।वे दोनों गया रामानुज मठ में दर्शन करने के लिए जाया करते थे । इस दौरान इस मठ में स्वामी देव नारायण आचार्य से अवध सिंह और दिलीप सिंह का संपर्क हुआ । इसके बाद उनसे बातचीत होने लगा । फिर बातचीत करने के दो सप्ताह बाद देवनारायण जी उन दोनों को माता- पिता के सलाह से पढ़ाई कराने एवं एक महीने के बाद गया लौटने के आश्वासन के बाद सिकोहावाद स्थित राधा किरिषण ,मठ ले आए,जो कछला सिरीज़, पुलिस स्टेशन के पास पड़ता है । जब एक महीना पूरा हो गया,तब वे दोनों गया (बिहार) वापस नहीं लौटे,तब संपर्क करने पर पता चला कि वे दोनों राधाकृष्ण में रह रहे हैं । इसके बाद उनके पिताजी के साथ श्री शिव वचन सिंह ( कारा पुलिस, गया) राधाकृष्ण मठ सिकोहावाद गये । वहां पहुंचने पर स्वामी उपेन्द्र आचार्य ने बताया कि दोनों लड़के स्वामी देवनारायण जी के साथ यहां सिर्फ एक महीना रहे थे, फिर यहां से दोनों कहां गए, मुझे नहीं मालूम । तब उनके पिताजी घर वापस आ गये । फिर देवनारायण आचार्य को खोजते-खोजते माता -पिता तीन साल पहले स्वर्ग धाम चले गए । तब पच्चीस साल के बाद लापता दोनों लड़कों में से एक लड़का दिलीप सिंह माता-पिता के मरने के बाद भरथरी साधू बनकर अचानक अपने मूल निवास गांव- बिहीआईन, थाना-वजीरगंज वापस आया और अपने माता-पिता के बारे में पूछा,तब गांव वालों ने उनको बताया कि आपके माता-पिता मर गए हैं । तब गांव वालों ने उनसे पूछा कि आपके भाई अवध सिंह कहां हैं? तब दिलीप सिंह साधू ने बताया कि शुरु में हम दोनों साथ रहते थे, फिर बाद में मुझसे उसे अलग कहां ले गए, मुझे नहीं मालूम । फिर वे गांव से बाहर चला गया और तब मुझे गांव के जय राम सिंह ने फोन करके बताया , तब मैं उसके साथ मिलने के लिए ‌गाजियावाद से गया गया । इसके बाद मैंने बातचीत करने के बाद एक प्रश्न पूछा कि श्री देवनारायण आचार्य जी कहां रहते हैं, तब उन्होंने उनके बारे में नहीं बताया । फिर मैंने पूछा कि आप वर्तमान में कहां रहते हैं, तो उन्होंने मुझे बताया कि” मैं पाटन देवी , उतर प्रदेश में रहता हूं । फिर मैंने पूछा कि घर पर रहिए, वहां रहने की क्या जरूरत है? तब उन्होंने कहा कि मैं भरथरी साधू बन गया हूं । मुझे गुरु के द्वारा घर पर रहने के आदेश नहीं है । इसके बाद वे सारंगी बजाकर चार भजन सुनाए । इसके बाद हम उनसे मिलकर गाजियाबाद वापस आ गए।अभी आगे की खोज जारी है ।

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