रंगों और प्रेम का त्योहार है होली

kranti news punjab , (dist reporter) vishal man :-

जालंधर (विशाल )रंगों और प्रेम का त्योहार होली इस साल देशभर में 10 मार्च को मनाया जाएगा। होलाष्टक की समाप्ति 9 मार्च को होलिका दहन के साथ होगी। भारत के साथ विदेशों में भी होली का त्योहार बड़े उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन होलिक दहन किया जाता है और अगले दिन रंग वाली होली खेलने की परंपरा है। इसी के साथ इस दिन से सर्दी के मौसम को विदाई दी जाती है और गर्मी के मौसम का स्वागत किया जाता है।ऐसा माना जाता है कि होली में रंगों के ज़रिए संस्कृति के रंग में रंगकर सारी भिन्नताएं मिट जाती हैं और सब बस एक रंग के हो जाते हैं, वहीं, दूसरी ओर धार्मिक रूप से होली बहुत महत्वपूर्ण है।होली का पर्व राधा और कृष्ण की पवित्र प्रेम कहानी से जुड़ा हुआ भी माना जाता है। वसंत के सुंदर मौसम में एक दूसरे पर रंग डालना उनकी ही लीला का अंग माना गया है। मथुरा और वृंदावन की होली राधा और कृष्ण के इसी रंग में डूबी हुई होती है। बरसाने और नंदगांव की लठमार होली देश-विदेश में प्रसिद्ध मानी जाती है।

आखिर क्यों मनाई जाती है होली
पौराणिक कथाओं के अनुसार राक्षस प्रवृत्ति वाला हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद की भगवान के प्रति भक्ति को देखकर बहुत परेशान था। उसने प्रह्लाद का ध्यान ईश्वर से हटाने के लिए हर संभव कोशिश की लेकिन उसे इसमें सफलता नहीं मिली। अंततः हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को जान से मारने का फैसला किया। उसने इसके लिए अपनी बहन होलिका से आग्रह किया। ऐसा कहा जाता है कि होलिका को भगवान भोलेनाथ ने वरदान दिया था कि वो कभी भी आग में नहीं जलेगी।इस वरदान को पाने वाली होलिका ने सोचा कि वह प्रह्लाद को आग में लेकर जाएगी। इस तरह प्रह्लाद की जलने से मृत्यु हो जाएगी जबकि होलिका सुरक्षित बाहर आ जाएगी। हालांकि हुआ इसके ठीक विपरीत – भगवान विष्णु ने प्रह्लाद की रक्षा की और होलिका का दहन हो गया। इस तरह सभी ने अच्छाई पर बुराई की जीत के प्रतीक स्वरूप मिठाइयां बांटी और होली के त्योहार की शुरुआत हुई। होली के दिन गिले शिकवे भुलाकर सभी एक दुसरे को रंग लगाकर और मिठाई खिलाकर इस त्योहार को मनाते हैं।

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