उन्नाव सीएमओ आशुतोष कुमार की लापरवाही के चलते अवैध अस्पताल संचालको के हैसले बुंलद

kranti news unnao , (beauro chief) adarsh dixit :-

जिले में निजी अस्पतालों व क्लीनिक के पंजीयन को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

👉🏼 अधिकांश जगह क्लीनिक के नाम पर नर्सिंग होम और पैथोलॉजी सेंटर चल रहे हैं।

👉🏼 कई जगह झोलाछाप क्लीनिक चला रहे हैं। कई जगह क्लीनिक का बोर्ड लगाकर हास्पिटल चल रहे हैं। अधिकांश क्लीनिक के अंदर पांच से दस बेड हैं। यहां मरीजों को भर्ती किया जाता है। प्रसव से लेकर बड़े आपरेशन तक किए जाते हैं। नर्सें व कंपाउंडर उपचार, दवा लिखने के साथ ही प्रसव भी करवाते हैं। जानकारों के मुताबिक क्लीनिक में गर्भपात जैसे गैर कानूनी काम भी किए जाते हैं। एक्ट के तहत इनका रजिस्ट्रेशन न होने से विभाग के पास इनकी पुख्ता जानकारी नहीं है।

👉🏼 शहर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत जिला अस्पताल के नजदीक नव निष्ठा हॉस्पिटल सिविल लाइंस स्थित इसी की दूसरी शाखा नव निष्ठा हॉस्पिटल गदन खेड़ा बाईपास स्थित जय मां हॉस्पिटल ,बैसवारा हॉस्पिटल, लालू खेड़ा स्थित हरिवंश राय बच्चन महाविद्यालय के बगल में पुष्पा हॉस्पिटल , आजाद हॉस्पिटल सहित तमाम मानक विहीन हॉस्पिटल अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं।

👉🏼 कई जगह झोलाछाप क्लीनिक चला रहे हैं। कई जगह क्लीनिक का बोर्ड लगाकर हास्पिटल चल रहे हैं। अधिकांश क्लीनिक के अंदर पांच से दस बेड हैं। यहां मरीजों को भर्ती किया जाता है। प्रसव से लेकर बड़े आपरेशन तक किए जाते हैं। नर्सें व कंपाउंडर उपचार, दवा लिखने के साथ ही प्रसव भी करवाते हैं। जानकारों के मुताबिक क्लीनिक में गर्भपात जैसे गैर कानूनी काम भी किए जाते हैं। एक्ट के तहत इनका रजिस्ट्रेशन न होने से विभाग के पास इनकी पुख्ता जानकारी नहीं है।

👉🏼 मानक विहीन अस्पताल संचालक मरीजो से वसूलते हैं मनमाना शुल्क

👉🏼 मरीजों से मनमानी फीस वसूली सहित अन्य शिकायतों के बाद प्रदेश सरकार की ओर से क्लीनिकल एस्टेबलिसमेंट एक्ट बनाकर इसके प्रावधान लागू किए गए।

👉🏼 इसके तहत सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी चिकित्सालयों और क्लीनिक के ऑनलाइन पंजीकरण के साथ मरीजों से निर्धारित फीस ली जाए। अधिकतर निजी चिकित्सालय संचालकों ने पंजीकरण को लेकर रुचि नहीं दिखाई।

👉🏼 नर्सिंग होम में चला रहे पैथोलॉजी

👉🏼 बिना पंजीयन के चल रहे निजी अस्पतालों में पैथोलॉजी का काम

👉🏼 इन प्रयोगशालाओं की गुणवत्ता और कार्मिकों के प्रशिक्षण की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। डायग्नोसिस सेंटर व लैब संचालक मरीजों से मनमुताबिक जांच शुल्क वसूलते हैं। कई बार चिकित्सक के मनपसंद डायग्नोसिस सेंटर व लैब में जांच नहीं कराने पर रिपोर्ट को नकार दिया जाता है।

👉🏼 सरकारी डॉक्टरों की खूब चलती क्लीनिक

जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का मखौल उड़ाने में सरकारी चिकित्सक भी पीछे नहीं हैं। सीएमओ कार्यालय के पास एक सरकारी महिला चिकित्सक करीब चार साल से क्लीनिक चला रही है। । इनकी तैनाती मौजूदा समय उन्नाव के बिछिया स्थित सीएचसी में नेत्र चिकित्सक के पद पर है। कई बार जांच भी हुई। शासन-प्रशासन में अच्छी पकड़ के चलते हर बार जांच ठंडे बस्ते में चली जाती है।

👉🏼 क्लीनिक के नाम पर चल रहे नर्सिंग होम

👉🏼 क्लीनिक में बेड डालकर प्रसव से लेकर आपरेशन का चलता खेल, चिकित्सा अधिकारियों के संरक्षण में जगह-जगह खुले हैं क्लीनिक

👉🏼 जनपद में अपने आप को सर्वश्रेष्ठ बताने वाला आशा हॉस्पिटल भी है मानक विहीन इसके विरुद्ध कब होगी कार्यवाही?

👉🏼 क्या मानक विहीन अस्पतालों के सुविधा शुल्क के बोझ तले दबा है उन्नाव का स्वास्थ्य विभाग

👉🏼 नर्सिंग होम एक्ट का खुलेआम हो रहा उल्लंघन

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