सोशल आडिट के जरिये निचले स्तर के लोंगों को लाभ दिलाने का प्रयास

जनार्दन श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ

शाहाबाद(हरदोई) – सोशल ऑडिट, ऑडिट का एक ऐसा हिस्सा है इसमें मनरेगा के अंतर्गत काम करने वाले श्रमिकों से पूछा जाता है कि जो उनको धनराशि प्राप्त हुई उसका उपयोग किस प्रकार किया ।उसको प्राप्त करने से उनके जीवन में क्या बदलाव आया क्या जब वह बाहर काम करने जा रहे थे और अब गांव में काम मिल रहा है इससे क्या अंतर महसूस करते हैं। सोशल ऑडिट में कार्यों की गुणवत्ता चेक की जाती है जिससे ग्राउंड में जो परिसंपत्तियां बनी हैं या जो पक्के कार्य हुए हैं उनसे क्या उपयोगिता है ग्राम पंचायत में जो चकरोड बने उसका उपयोग में किस प्रकार से करते हैं प्रधानमंत्री आवास मिलने के बाद उनके जीवन में क्या बदलाव आया मनरेगा के अंतर्गत व्यक्तिगत कार्य होने वे आजीविका बढ़ाने में किस प्रकार से सहायक हुए। सरकारी धन का खर्च होने से ग्राम पंचायतों में क्या क्या बदलाव आए। इन सभी का परीक्षण ग्राम वासियों के सामने ही किया जाता है। सोशल ऑडिट के लिए जनपद पर साक्षात्कार आयोजित करके सोशल ऑडिट टीम का गठन किया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया जनपद में जिला विकास अधिकारी के अधीन रहती है जबकि इसका मुख्य नियंत्रण अधिकारी जिला अधिकारी है।आगामी वर्षों में सोशल ऑडिट में सभी पेंशन स्कीम और 15वें वित्त के अंतर्गत कराए जाने वाले ग्राम पंचायत के कार्य सम्मिलित हो सकते हैं।

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