शिव सत्संग मण्डल की केन्द्रीय कार्यकारिणी की बैठक में धर्म, अध्यात्म,एवं योग का पाठ पढ़ाया गया

ब्यूरो चीफ जनार्दन श्रीवास्तव

हरदोई – शाहाबाद शिव सत्संग मण्डल की अ.भा. कार्यकारिणी की बैठक में धर्म,अध्यात्म, संस्कृति,प्रार्थना,उपासना, जप,तप, व्रत,ध्यान,भजन,सत्संग,सेवा और योग का पाठ पढ़ाया गया।
शिव सत्संग मण्डल के आद्य परमाध्यक्ष संत श्रीपाल के पावन सानिध्य में टोडरपुर के निकटवर्ती राजस्व ग्राम हुसेनापुर धौकल के शिव सत्संग मण्डल आश्रम में हुई केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल की सभा को संबोधित करते हुए शिव सत्संग मण्डल के संयोजक अम्बरीष कुमार सक्सेना ने कहा कि योग एक अखंड संस्कृति, विश्व संस्कृति है जिसे वर्तमान समय में विश्व के सभी प्रकार के योग की उदात्त भावनाओं में समरसता, समन्वय, पूर्ण उपचार और पूर्ण स्वास्थ्य स्थापित कर, योग के इस प्रमुख उद्देश्य को प्रतिष्ठित किया जाना है। तभी हम सब इस पूरे विश्व को स्वयं अपना ही स्वरूप जान पाएंगे। यही मुक्ति है। यही दिव्य जीवन की प्राप्ति है।उन्होंने कहा कि दुनिया को ध्यान की जरूरत है चाहे वह किसी भी देश या धर्म का व्यक्ति हो। ध्यान से ही व्यक्ति की मानसिक संवरचना में बदलाव हो सकता है। ध्यान से ही हिंसा और मूढ़ता का खात्मा हो सकता है। ध्यान के अभ्यास से जागरूकता बढ़ती है।
लखीमपुर के जिलाध्यक्ष जमुना प्रसाद ने कहा कि जीवन में भौतिक उपलब्धियां ही पर्याप्त नहीं हैं। इनके साथ ही आध्यात्मिक मूल्यों की भी आवश्यकता है। ईश्वरीय विचार ही आध्यात्मिक मूल्य हैं। स्वयं की पहचान या स्वानुभव ही अध्यात्म है। इसे आत्मचिंतन भी कहते हैं।आवश्यकता है जीवन में ज्ञान को उतारने की।शुभ चिंतन और तदनुसार कर्म से बुद्धि निर्मल होगी और चित्ता शांत होगा। सद्ज्ञान का दिव्यप्रकाश, मोहजन्य अंधकार के मिटने पर ही होता है। बार-बार विचार करना चाहिए कि सांसारिक भोगों की सत्ता क्षणिक है, ये चिरस्थायी नहीं है। आध्यात्मिक चिंतन से ही जीवन में सुधार आता है और मानसिक उत्थान होता है। संतोष वृत्तिलाकर सहज जीवन जिया जा सकता है।
वरिष्ठ सत्संगी रविलाल ने बताया कि
महर्षि पतंजलि ने योग सूत्र में अष्टांग योग की व्यवस्था दी है, जो इस प्रकार हैं- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। ये सभी एक-दूसरे से जुड़ने वाली कड़ियां हैं, जिसका चरम समाधि होता है।उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में आज, बल, बुद्धि और माधुर्य जैसे उदात्त गुणों को भरने के लिए बच्चों एवं युवाओं के लिए विशेष योग शिविर चलाए जा रहे हैं। जिनमें अष्टांग योग, आसन, प्राणायाम, ध्यान एवं मुद्राएँ आदि के बारे में बताने के साथ-साथ आध्यात्मिक एवं नैतिक रूप से उन्नति के भी सूत्र बताए जाते हैं।
व्यवस्थापक यमुना प्रसाद ने कहा कि
सभी धर्म, धर्माचार्य, संत तथा ऋषि-मुनि आध्यात्मिक मूल्यों को सर्वोच्च महत्व देते हैं । हिन्दू धर्म के आध्यात्मिक मूल्यों का अनुक्रम है-धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष । अर्थ तथा काम सांसारिक मूल्य है, जबकि धर्म तथा मोक्ष आध्यात्मिक मूल्य हैं । परन्तु धर्म का स्थान सर्वप्रथम है । यह अर्थ तथा काम दोनों का प्रेरक तथा शासक है ।निस्संदेह मोक्ष, जिसका अर्थ है सभी सांसारिक इच्छाओं तथा आसक्तियों से मुक्ति, सर्वोच्च मूल्य है।

इस धार्मिक मण्डल की सभा का शुभारम्भ निगोही अध्यक्ष विनोद मिश्र ने दीप प्रज्वलित कर,सामूहिक ईश प्रार्थना से किया।मंडलाध्यक्ष आचार्य अशोक,शाहजहांपुर के जिला महामंत्री रजनीश,चेतराम,स्वामी दयाल,श्रीपाल राठौर,शतानन्द,बहिन नमिता,रौनक आदि ने प्रश्नगत बिंदुओं पर संवाद किया।
व्यवस्थापक यमुना प्रसाद ने आगामी 15 मार्च 2020 को ब्लॉक शाहाबाद के ग्राम पुरवा पिपरिया में धर्मोत्सव आयोजित किये जाने की घोषणा की।समापन पर सभी पदाधिकारियों ने संयमित जीवन शैली के साथ ध्यान योग करने का शिव संकल्प लिया।

Translate »
क्रान्ति न्यूज - भ्रष्टाचार के खिलाफ क्रांति की मशाल