नागरिकता संशोधन कानून (सी.ए.ए.) जाति के आधार पर नहीं बल्कि पड़ताड़ित करने के आधार पर नागरिकता देती है ।

क्रांति न्यूज, ब्यूरो प्रमुख- कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह.

गाजियाबाद । दि०28/02/20 – भारत में कुछ ऐसे देशद्रोही पत्रकार हैं जो समाचार पत्र और पत्रिकाओं में नागरिकता संशोधन कानून के संबंध में गलत जानकारी छापकर जनता को वेवकूप बनाते रहते हैं ।पुरी दुनिया में यह बात मालूम है कि पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान में गैर-मुसलमानों के साथ वहां के मुसलमान अत्याचार करते हैं । अगर ऐसी स्थिति में भारत सरकार 1955 की पुरानी नागरिकता कानून को बदलकर गैर-मुसलमानों के लिए नागरिकता संशोधन अधिनियम बनाया है तो इसमें कोई गलती नहीं है । कुछ सिरफिरे पत्रकार कहते हैं कि यह भेदभाव फैलाने वाला कानून है । जब यह कानून भारतीय मुसलमानों के साथ कोई अन्याय नहीं कर रहे हैं तो यह कानून भेदभाव करने वाला कैसे हो गया? जब पड़ोसी देशों में गैर-मुसलमानों के साथ वहां के मुसलमान भेदभाव कर रहे हैं तो ऐसी स्थिति में पीड़ित शरणार्थियों को सहायता कर भारत की नागरिकता देना बिल्कुल ग़लत नहीं है ।ऐसा करने से भारतीय कानून के अनुच्छेद-14 का कोई उलंघन नहीं है । जो पत्रकार यह लिखते हैं कि पाकिस्तान में भी कुछ मुजाहिर मुसलमान है । इसके साथ वहां के मुसलमान भेदभाव करते हैं । वहां सुन्नी समुदाय के लोग शिया समुदाय के लोगों के साथ अत्याचार करते हैं , जैसे भारत में पिछड़ों, दलितों और बौद्धों के साथ किए जाते हैं । सबसे पहले तो यह समझना आवश्यक है कि पाकिस्तान में मुजाहिर मुसलमानों के साथ अत्याचार कोई अन्य धर्मों के लोग नहीं करते हैं । अगर उनके साथ अत्याचार होते हैं तो केवल सत्ता संघर्ष के कारण । अगर वहां अत्याचार मुसलमानों के साथ मुसलमान करते हैं तो इसके लिए पाकिस्तान के खिलाफ धरना प्रदर्शन क्यों नहीं करते हैं ?शिया के साथ सुन्नी अत्याचार कर रहे हैं तो पाकिस्तान ,अफगानिस्तान और बंगलादेश में मुजाहिर मुसलमान वहां के सरकार के खिलाफ आंदोलन क्यों नहीं करते हैं ? संयुक्त राष्ट्र संघ के रिपोर्ट के मुताबिक मुस्लिम देशों में गैर-मुसलमानों के साथ घोर अत्याचार किए जा रहे हैं । ऐसी स्थिति में भारत सरकार पीड़ित धर्म के लोगों को जाति के आधार पर नहीं बल्कि पड़ताड़ना के आधार पर भारत की नागरिकता प्रदान कर रहीं हैं तो इसमें लेशमात्र भी गलती नहीं है ।जो पत्रकार भारत में दलितों, पिछड़ों और बौद्धों पर हो रहे अत्याचार को दिखा रहे हैं, वे सब सरासर झूठ और राजनीति से प्रेरित है । कहां किसके उपर अत्याचार हो रहे हैं और कौन किस पर अत्याचार कर रहे हैं – यह सब हिंदूओं की निजी मामले हैं।जो पत्रकार हिंदुओं के आपस में लड़ाने के काम कर रहे हैं और जाति के नाम पर भेदभाव दिखाकर आपस में एक होने से रोकना चाहते हैं, उनकी यह साजिश विफल हो जायेंगे । भारत में कोई भेदभाव नहीं है । सभी जाति के लोग और गैर मुस्लिम पड़ोसी देश से पीड़ित हैं ।चाहे हिंदू हो अथवा सिख,जैन, पारसी और इसाई-ये सभी बाहरी देशों के मुसलमानों से तंग आ चुके हैं ।साथ ही मैं यह भी कहना चाहता हूं कि अगर भारत को हिन्दू राष्ट्र बना दिए जाएं तो यह गैर-मुसलमानों के हित के लिए उचित रहेगा और यहां मनुस्मृति के अनुसार नहीं बल्कि श्रीराम के मर्यादा पर रामराज्य स्थापित होकर रहेगा । भारत में रामराज्य का कोई भी विरोधी नहीं हैं । अगर रामराज्य के विरोधी हैं तो इससे किसी को कोई परेशानी भी नहीं होंगे ।सी.ए.ए से जातिवाद खत्म होंगे और भारत ग़ैर मुसलमानों के लिए सबसे सुरक्षित जगह होंगे । भारत सरकार किसी के साथ भेदभाव नहीं कर रही है और जो पत्रकार नागरिक संशोधन अधिनियम के संबंध में भ्रामक विचार प्रस्तुत कर रहे हैं वे देशद्रोही से कम नहीं हैं । आप अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए देश के साथ गलत नहीं करें,इसी में आपकी भलाई है ।

Translate »
क्रान्ति न्यूज - भ्रष्टाचार के खिलाफ क्रांति की मशाल