असहमति भी देशद्रोहियों की पहली पहचान है ।

क्रांति न्यूज, ब्यूरो प्रमुख -कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह. गाजियाबाद.दि० 26/02/20. आप चाहे तो किसी भी विचार से असहमत हो सकते हैं, परंतु देशभक्ति के विषय पर असहमत होना देशद्रोह से कुछ भी कम नहीं है ।आज के नेता देश से प्रेम कम, लेकिन कुर्सी से ज्यादा लगाव कर रहे हैं ।आज के विपक्षी पार्टी के नेता अपनी कुर्सी की लालच में देशद्रोहियों के साथ देने में शर्म महसूस नहीं करते हैं ।आज के नेताओं को आतंकवादियों के विरुद्ध बोलने में भी दिक्कत महसूस कर रहे हैं । जो नेता देशहित के संबंध में बात करें या कानून बनाये, तो देशद्रोही उनके खिलाफ भी अनाप-शनाप बकने से नहीं थकते हैं । कुछ पत्रकारों ने भी देशद्रोहियों के समर्थन में फटाफट खबरें छापने में गौरव महसूस कर रहे हैं । ऐसी स्थिति में भारत माता की रक्षा के लिए कौन सामने आकर लड़ने को तैयार हैं? अगर जो भक्त देशसेवा के लिए देशद्रोहियों से लड़ने के लिए शांति पूर्वक योगदान देने को इच्छुक हैं, वे हमारे वाट्स ऐप नंबर- पर अपना नाम और मोबाइल नंबर लिखकर बताइए। मैं देशभक्तों को स्वागत करने को तैयार हूं ।आज के समय में देशद्रोहियों को कड़ी सबक लेने की आवश्यकता है ।इस लड़ाई को शांति पूर्वक कानून के दायरे में लड़ना है ।आज देश के दुश्मनों को ऐसा सबक सिखाने की आवश्यकता है, जिसे सीखकर वे भारत माता के खिलाफ कभी भी बोलने का दुस्साहस नहीं कर सके ।आज देशभक्तों को सरदार भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद बनने का समय आ गया है । अब आपको सोचना है कि आप क्या बनते हैं देशभक्त अथवा देशद्रोही ? असहमति भी देशद्रोहियों की पहली पहचान है।

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