उन्नाव: मुआवजे को लेकर किसानों के प्रदर्शन में 2 FIR, 36 नामजद और 200 अज्ञात के खिलाफ केस

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उन्नाव. उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम की ट्रांस गंगा सिटी परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिलने से नाराज हजारों किसान उन्नाव में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. शनिवार को हुए प्रदर्शन के बाद गंगाघाट कोतवाली में पूरे मामले में दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं और कुल 36 नामजद और 400 अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है. पहले केस में यूपीएसआईडीसी की तरफ से 7 नामजद व 200 अज्ञात पर मुकदमा दर्ज कराया गया है. वहीं, दूसरा मुकदमा पुलिस की तरफ से 29 नामजद और 200 अज्ञात पर मुकदमा दर्ज कराया गया है. घटनाक्रम में अब तक 5 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है.

दूसरी तरफ, रविवार को एक बार फिर किसान उग्र हो गए और उन्होंने ट्रांस गंगा सिटी एरिया के करीब एक किलोमीटर की परिधि में बने सब स्टेशन पर हमला कर दिया. किसानों ने सब स्टेशन के पास पड़े प्लांट के पाइपों को आग के हवाले कर दिया. आगजनी की इस घटना से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है. आनन-फानन में दमकल की गाड़ियां मौके पर भेजी गईं. बता दें कि शनिवार को प्रदर्शनकारी किसानों ने जेसीबी और गाड़ियों पर पथराव किया, जिसके बाद पुलिस को बुलाना पड़ा थे. मौके पर 12 थानों की पुलिस और पीएसी की टुकड़ी को भी तैनात किया गया है. एक किसान नेता ने बताया कि हम लोग दो साल से लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन सरकार हमारी बात को नहीं सुन रही.

उचित मुआवजा नहीं मिलने से गुस्से में किसान
किसानों का आरोप है कि वर्ष 2005 में बगैर समझौते के उनकी जमीनों को अधिगृहित कर लिया गया था, लेकिन बदले में उन्‍हें पर्याप्‍त मुआवजा नहीं दिया जा रहा. इसके विरोध में हम सड़क पर उतरे हैं.

2003 में बनी थी ट्रांस गंगा हाई टेक सिटी योजना
वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में ट्रांस गंगा हाईटेक योजना बनी थी. उस समय किसानों की जमीन का मुआवजा इतना कम था कि उन्होंने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ली थी. बाद में साल 2007 में जब प्रदेश में बीएसपी की सरकार बनी तो मुआवजे की दर 2.51 लाख रुपये से बढ़ाकर 5.51 लाख रुपये कर दी गई. लेकिन यूपीएसआईडीसी योजना के तहत भूमि अधिग्रहण का काम वर्ष 2012 तक नहीं कर पाई.

इसके बाद 2012 में जब यूपी में फिर से समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो विभाग ने किसानों की जमीन अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया. इसके विरोध में किसान सड़क पर उतर आये. किसानों की मांग थी कि पूर्व में जो दरें लागू की गई थीं, वो वर्तमान में बहुत कम हैं. इसलिए मुआवजे की राशि को बढ़ाया जाए.

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