खाता न बही जितना कब्जा कर लो सब है सही

kranti news barabanki , (beauro chief ) anoop singh :- आदर्श नगर पंचायत टिकैतनगर में आजकल अतिक्रमण करना सरकारी जमीनों पर आम बात सी हो गई है। यहां पर सरकारी जमीन हो तालाब हो या नाला हो सभी पर अतिक्रमण कर लो कब्जा कर लो और प्रशासन सोता रहता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार। टिकैतनगर में तालाब संख्या 202 की परिधि में दो मीटर कब्जा कल्लू कबाड़ी पुत्र ढॊढे ने कर रखा है। जिसकी लिखित शिकायत अधिशासी अधिकारी कुमारी कीर्ति सिंह टिकैतनगर ने की है उसके अंतर्गत आगे नाला है जो जमीन शेष बची है उस जमीन पर कल्लू कबाड़ी। रन्जीत मौर्य पुत्र प्रेम चन्द्र मौर्य रामू यादव लक्ष्मण तिवारी पुत्र संकटा प्रसाद तिवारी हरेंद्र सिंह रामविलास मौर्या इसरार आदि और भी तमाम लोग हैं जिन्होंने उक्त भूमि पर बिना कोई राजस्व शुल्क चुकाए अवैध कब्जा कर रखा है। उक्त भूमि यहां के स्थानीय राजा जमींदार राय रवि बली सिंह के अन्डर मे है लोगों ने उन्ही ले ली है। और उनका कहना है हमने लोगों को जमीन मुफ्त में दी है या पैसे से यह किसी का कोई विषय मायने नहीं रखता हां, यदि खरीद-फरोख्त होती है तभी उस पर कोई कार्रवाई की जा सकती है हमारी जमीन है हम किसी को देंअथवा ना दें इसके मालिक हम स्वयं हैं l इस तरह के कथन जमीदार राजा राय रवि बली जी का है। इनके इसी कथन के नाते जो उक्त भूमि पर काबिज हैं उनके पास कोई जमीन का अभिलेख। प्रमाण पत्र नहीं है जो जितना कब्जा कर लेता है उसके आगे निरंतर कब्जा करना उसकी आदत सी बन गई है। स्थानीय प्रशासन और लेखपाल सन्तराम वर्मा की मिली भगत से लोग जमीन निरंतर कब्जा कर रहे हैं। इस पर टिकैतनगर की अधिशासी अधिकारी कुमारी कीर्ति सिंह ने एक लिखित तहरीर भी कोतवाल शमशेर सिंह को दी है लेकिन उस पर स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से कोई कार्यवाहीअब तक नहीं की गई और कब्जे दार के ऊपर उक्त कहावत। चरितार्थ होती दिख रही है_ “खाता ना बही। जितना कब्जा कर लो सब है सही” प्रशासन मेरी जेब में लोग मेरा क्या कर लेंगे? ऐसा कहना है यहां के उन भू माफियाओं का जो सरकारी संपत्ति को तो छति पहुंचाते ही हैं साथ ही साथ राजस्व की चोरी करते हैं जिससे उत्तर प्रदेश सरकार को करोड़ों का चूना यहां अकेले टिकैतनगर में ही लग रहा है। तालाबों पर अतिक्रमण बहुत तेजी से कुकुरमुत्ते की तरह फैलता जा रहा है बहुत से तालाबया तो अतिक्रमण की भेंट चढ गए हैंया उन तालाबो का अब अस्तित्व ही केवल कागजो मे सिमट कर रह गया है और अतिक्रमण करने वालों ने उस पर अपना अवैध कब्जा कर भवन बना लिया है या दुकान बना ली है कुछ ही तालाब बचे है बताते चले टिकैत नगर में 32 तालाब है जो अब कागज पर ही सिमट कर रह गये हैं इन भू माफ़ियाओ के पास कोई भी भू संपत्ति का अभिलेख उपलब्ध नहीं है मजे की बात यह है कि इन भू माफियाओं पर कोई भी कानूनी कार्रवाई आज तक नहीं हो पाई। सब कागजों पर कार्रवाई होती है और कागजों पर ही लिखकर उसका निपटारा कर दिया जाता है। भू माफियाओं पर कार्रवाई इसलिए भी नहीं की जा सकी है कि उनके ऊपर सत्ता पक्ष के स्थानीय नेताओ का भी वरद हस्त का संरक्षण प्राप्त है। ऐसा प्रतीत होता है कि कतिपय कारणों से टिकैतनगर की सरकारी संपत्तियां जो आज करोड़ों की है अब कौड़ियों के भाव भू माफिया कब्जा कर अपना वर्चस्व दिखा रहे हैं। जिससे इनकी पव बारह है। समाचार पत्रों की भीअनदेखी की जाती है। जिला सूचना विभाग भी कानों में तेल डालकर कोई कार्यवाही नहीं करता है अगर कार्रवाई की गयी होती तो शायद दयनीय स्थिति जन्म नही लेती यहां का स्थानीय प्रशासन तहसील प्रशासन और जिला प्रशासन पूरी तरह कुंभकरणी नींद में सोया हुआ है प्राप्त जानकारी के अनुसार कल्लू कबाड़ी। लक्ष्मण तिवारी रन्जीत मौर्य हरेंद्र सिंह रामू यादव इसरार _ रामविलास मौर्या आदि बहुत लोगों ने कब्जा कर लिया है और इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज भी कराई जा चुकी है। स्थानीय निवासी मुकेश कुमार जैन पुत्र स्वर्गीय प्रभाष जैन ने अवगत कराया कियह लोग जमीन जबरन कब्जा कर रहे हैं जिससे सरकारी संपत्ति को हानि हो रही है। और अतिक्रमण निरंतर बढ़ रहा है। इन पर अब नितान्त कार्रवाई की जानी चाहिए बताते चले स्थानीय समाजसेवी पंडित विष्णु जोशी ने भी पहले उक्त मुद्दे को तालाबों का अतिक्रमण और सरकारी संपत्तियों पर कब्जे का विषय उठाया था। लेकिन कोई कार्यवाहीआज तक सुनिश्चित नहीं की जा सकी। टिकैतनगर में तालाबों में लगभग। 18 लोग अतिक्रमण करते हुए पाए गए हैं जिसकी सूची राजस्व अधिकारी व लेखपाल संतराम वर्मा ने नगर प्रशासन को उपलब्ध कराई है l लेकिन राजस्व प्रशासन की लापरवाही भी बहुत उजागर हो गई है कि सिर्फ कागजी कार्रवाई। उपलब्ध करा देने से कोई काम नहीं होता है। और अब कोई भी एक्शन नहीं लिया गया तो ऐसे अतिक्रमणकारियों पर सिर्फ कागज में लिख देना। कि 18 लोग अतिक्रमण कर रहे हैं या कर चुके हैं का कोई फायदा नहीं है। यह राजस्व प्रशासन की बहुत बड़ी लापरवाही है। जो सिर्फ पैसों की सांठगांठ करके लोगों के अतिक्रमण में खाऊ कमाऊ की नीति अपनाते हुये सहयोग करते हैं। वर्तमान में लेखपाल संतराम वर्मा की भी भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। क्योंकि राजस्व की हानि हो रही है इनकी संलिप्तता भी इसमें उजागर होती नजर आ रही है। अगर इस तरह नालो और तालाबो अतिक्रमण पर त्वारित कार्यवाही न हुई तो जल का संचालन अवरुध हो जायेगा और जल निकासी की समस्या जन्म लेगी तालाबो का संकट उक्त अतिक्रमण से नस्ट हो जायेगा अब तक कोई कार्यवाही न हो पाने से स्थानीय नागरिकों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है।

Translate »
क्रान्ति न्यूज - भ्रष्टाचार के खिलाफ क्रांति की मशाल