बाबा कालसेन मन्दिर पर आने वाले भक्त की होती है मनोकामना पूर्ण

उमाकान्त , व्यूरो चीफ

शाहजहाँपुर : — शहीदों की नगरी से मशहूर एवँ गंगा राम गंगा गर्रा , खन्नौत , बहगुल आदि नाड़ियो को अपने आगोश में समेटने वाले जनपद में यो तो कई धार्मिक स्थल जैसे सुनासिर नाथ मंदिर कस्बे से थोड़ी दूर स्थित गांव कुतुआपुर स्थित जालिपा देवी मंदिर अपनी अपनी ख्याति के लिए जहाँ मशहूर है। वही जनपद से हरदोई जाने वाले मुख्य सड़क मार्ग एवं जिला मुख्यालय से करीब 19 किलोमीटर दूर पढ़ने वाला कस्बा शेरा मऊ दक्षिणी है। कस्बे के मध्य स्थित बाबा कालसेन मंदिर पर आषाढ़ी के दिन होने वाले हवन पूजन के बाद एक हफ्ते तक चलने वाले मेले में बाबा कालसेन के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ हो जाती है । जिसके लिए ग्राम प्रधान साफ सफाई की व्यवस्था अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों को लगाकर करते हैं ।
वता दे कस्बे के मध्य स्थित बाबा कालसेन मंदिर क्षेत्रीय गाँव के लोंगों में अटूट श्रद्धा एवं आस्था का केन्द्र है । वैसे तो जिले में अनेक ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल है । परन्तु बाबा कालसेन मन्दिर पर क्षेत्रीय गाँवों के अलावा दूसरे जिलों में रहने वाले हिन्दू एवँ मुसलमान दोनों की बहुत आस्था है । बुजुर्ग बताते हैं कि कस्बा निवासी दरियाव सिंह बाबा कालसेन के अनन्य भक्त थे । अंग्रेजी हुकूमत के दौरान अफसरानों ने दरियाव सिंह पर बाबा कालसेन के नाम पर जनता को बरगलाने का आरोप लगाते हुए जेल में बन्द कर दिया था । आषाढ़ी के दिन दरियाव सिंह तथा ग्रामीणों ने अंग्रेज अधिकारियों से बाबा कालसेन के हवन पूजन करने की अनुमति माँगी । इस पर अंग्रेज हुक्मरानों ने इस मांग को ठुकराते हुए कहा कि बाबा कालसेन में ताकत होगी तो वह दरियाव सिंह को छुड़ाकर दिखाये । और पहरा सख्त करा दिया । बुजुर्गों के अनुसार आषाढ़ी के ही दिन दरियाव सिंह पर बाबा कालसेन का असर ( भाव ) आ गया और उन्होंनें जेल की मोटी मोटी सलाखों को तोड़ दिया और जेल से बाहर आ गए । जिन्हें जेल से निकलते हुए देखने के बाद भी किसी भी जेल कर्मी की हिम्मत रोकने की नहीं पड़ी तथा बाहर निकल कर उन्होंने कस्बा स्थित मन्दिर पर आकर हवन पूजन किया। बुजुर्ग बताते हैं कि ठाकुर दरियाव सिंह ने हवन पूजन करने के बाद वहाँ मौजूद भीड़ से कहा कि कस्बे एक किमी दूर स्थित यादवों एवँ गुर्जरों के मोहल्ले में बाबा कालसेन का अपमान करने के उद्देश्य वश महीनों से दूध में भिगोये गए बेंतों के बारे में बताते हुए बेंत मँगवा लिए तथा सड़ी महीन लकड़ी की भाँति तोड़ कर बराबर कर दिया । कहा जाता है कि इस के बाद उक्त मोहल्ले में रहने वाले यादव एवँ गुर्जर समुदाय के दुर्दिन शुरू हो गए। और दोनों समुदाय के लोग परिवार सहित दूरस्थ स्थानों पर रहने के लिए चले गए । जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण जनपद से हरदोई जाने वाले रोड पर पड़ने वाले मिर्गापुर गाँव के सामने पड़ने वाला खेड़ा यानी झापुल खेड़ा नामक स्थान आज भी मौजूद है । आषाढ़ मास की पूर्णिमा का हवन पूजन करने के बाद बाबा कालसेन के भक्त ठाकुर दरियाव सिंह पुनः जेल पहुँचे । तब अंग्रेज अफसरों ने न केवल उन्हें जेल में बंद करने से मना कर दिया बल्कि छमा याचना भी माँगी । तब से बाबा के मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ गई । तथा दूर दूर से बाबा के भक्त अषाढ़ मास की पूर्णिमा को यहाँ आकर पूजा अर्चना करके मनौतियां मांगते हैं ।तथा मनौती पूर्ण होने पर मन्दिर में घण्टे घण्टियाँ बांध जाते हैं। बाबा के मन्दिर पर होने वाले हवन में केवल देशी घी का ही उपयोग होता है । तथा हवन में हवन सामग्री का प्रयोग वर्जित है। वहीँ अषाढ़ पूर्णिमा के दिन होने वाले हवन में देशी घी श्रदालु अपने अपने घर से या फिर दुकान से खरीद कर लाते हैं। और बाबा का हवन कराने के बाद जय जयकार करते हुए अपने घर को जाते हैं। बाबा के दरबार में श्रद्धालु भक्तों की माँगी गई मनौती अति शीघ्र पूर्ण हो जाती है। जिसके प्रत्यक्ष प्रमाण स्वरुप मन्दिर प्रांगण में बँधी घण्टियाँ घण्टे इस बात का प्रमाण हैं । तथा बाबा के दरबार में झूँठी कसम खाने के नाम पर कोई भी व्यक्ति मन्दिर के अन्दर कदम नहीं रखता है। कभी कभी किये गए गुनाह से बचने के लिए झूँठ बोलने वाले को पुलिस कर्मी बाबा के मंदिर में कसम खाने को कहते हैं तो आरोपी या तो गुनाह कबूल कर लेता है अन्यथा मुँह छिपाकर भाग लेने में भलाई समझता है।
बाबा कालसेन श्रापवश सेहरामऊ दक्षिणी कस्बे के रकबे में यादव एवं गुर्जर और जाटव ( चमार ) समाज का व्यक्ति अपना निजी आवास बनाकर नहीँ रह सकता है । अगर वह कस्बा या फिर रकबे में मकान बनाकर रहने की कोशिश करता है तो उस पर आपत्तियाँ आनी शुरू हो जाती हैं ।मनौती पूर्ण होने पर श्रद्धालु भक्तगण मन्दिर परिसर का निर्माण आदि कार्य कराते हुए भव्यता प्रदान करने की कोशिश करके अपने आप को धन्य समझते हैं।

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