भारत का कानून मनुस्मृति का है अथवा विदेश का?

क्रांति न्यूज,( ब्यूरो प्रमुख) कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह:- गाजियाबाद .27/01/2020.कुछ लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि भारत का कानून मनुस्मृति का है अथवा विदेश का? इस संबंध में सबसे पहला सच यह है कि भारत का कानून मनुस्मृति और विदेश से लेकर संग्रह किया गया है । यहां का सभी कानून मनुस्मृति और बाहर के अन्य देशों से लिए गए हैं । इस संविधान के निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर नहीं हैं क्योंकि वे सिर्फ मनुस्मृति और विदेश में पहले से बनें कानून को सिर्फ संकलन करके भारत का संविधान प्रस्तुत किए हैं। जैसे आज के समय में भारत जाति और वर्ग निरपेक्ष देश नहीं बल्कि यह जाति और वर्ग प्रधान देश है। यहां हिन्दुओं की अनेक जातियों को चार वर्गों में बांट दिए गए हैं, जिसे सामान्य, पिछड़ा,अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के नाम से जाने जाते हैं । भारत में पहले चार वर्ण थे- ब्रह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र ।इन चार वर्णों के आधार पर चार वर्ग बनाये गये हैं । भारत में अनेक जातियों के लोग हैं, जिसे आज के समय में जाति प्रमाण पत्र बनाये जाते हैं । मनुस्मृति के आधार पर हीं वर्ण (वर्ग) और जातियों के प्रमाण पत्र बनाये जाते हैं। बाकी अन्य कानून अमेरिका, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, अफ्रीका और अन्य देशों से लिए गए हैं । इस क़ानून को किसी भारतीय नेता ने नहीं बनाये हैं । हां, जो कानून संशोधन करके बनाये गये हैं, वे हीं भारत के बनाये गये हैं। संशोधित कानून को भारतीय कानून कह सकते हैं, लेकिन बाकी सभी कानून विदेशियों का नक़ल है, जो पहले से बनें हुए थे। आजकल के नेता वोट बैंक के कारण संविधान निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर को मानते हैं । परंतु यह बात शत-प्रतिशत गलत है क्योंकि भारत का कानून मनुस्मृति और विदेश से लिए गए हैं;बनाये नहीं गये हैं । सिर्फ वोट लेने के लालच में भारत के संविधान का निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर को कहते हैं। इस प्रकार भारत के संविधान देश और विदेश के मिश्रित कानून हैं ।

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