पड़ोसी देश से आए हुए मुसलमानों को भारत की नागरिकता देने की आवश्यकता क्यों है ?

पड़ोसी देश से आए हुए मुसलमानों को भारत की नागरिकता देने की आवश्यकता क्यों है ?

क्रांति न्यूज (ब्यूरो प्रमुख) कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह :-
गाजियाबाद।जिसको जैसा अधिकार मिला है, उसे उसी अधिकार के अनुसार कार्य करना चाहिए । अगर आपको वह अधिकार नहीं मिला हुआ है तो उसे भी कोई कानून के तहत हीं कार्य कर सकते हैं । लेकिन जिसको कानून के अनुसार अधिकार नहीं मिला हुआ है तो वह ब्यक्ति उस कानून को लागू करने से रोक नहीं सकता है । भारत में कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री विधानसभा से प्रस्ताव पास करके राष्ट्रीय नागरिक संशोधन अधिनियम को अपने राज्य में लागू करने से मना कर रहे हैं । वैसे राज्यों में केरल और पंजाब के मुख्यमंत्रियों ने( CAA) राष्ट्रीय नागरिक संशोधन अधिनियम को विभाजनकारी बता कर इसे लागू करने से साफ मना कर दिए हैं । इनमें केरल सरकार तो नागरिक संशोधन अधिनियम के विरोध में सर्वोच्च न्यायालय में याचिका भी दायर कर चुके हैं ।पं बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस क़ानून को लागू करने से पीछे भाग रही है । मध्यप्रदेश, बिहार और राजस्थान की सरकार भी राष्ट्रीय नागरिक संशोधन अधिनियम को लागू करने से इंकार कर दिए हैं । इसके अलावे राजद, बसपा,सपा और आप जैसे विरोधी पार्टी के नेता भी राष्ट्रीय नागरिक संशोधन अधिनियम को पूरजोर तरीके से विरोध कर रहे हैं । मैं विरोध करने वाले सभी नेतागण से पूछना चाहता हूं कि क्या पड़ोसी देश के मुसलमानों को (भारत को छोड़कर) दुनिया के पचास देशों में रहने की जगह नहीं है? दूसरी प्रश्न आपसे यह है कि हिन्दूओं के लिए पूरी दुनिया में रहने के लिए कितने देश हैं? मैं तीसरा सवाल आप सभी से पूछना चाहता हूं कि पड़ोसी देश में पड़ताड़ित, भेदभाव और बलात्कार के शिकार किस धर्म के लोग हैं? मैं चौथे सवाल आपसे पूछना चाहता हूं कि मानवता के आधार पर गैर-मुसलमानों के साथ विकास के कौन- सा उचित कार्य किए हैं? मैं आप सभी से पांचवां प्रश्न पूछना चाहता हूं कि जिसे किसी ने मजहब के आधार पर कोई पड़ताड़ना नहीं किए हों, उसे भारत में नागरिकता देने की आवश्यकता है अथवा जो धर्म के आधार पर पड़ताड़ित है, उसे भारत की नागरिकता देने की आवश्यकता है? आपसे छठा प्रश्न यह है कि भारत में मुसलमानों की आबादी क्यों बढ़ रहे हैं और पाकिस्तान,बंगलादेश और अफगानिस्तान में गैर-मुसलमानों की आबादी क्यों घट रहे हैं? मैं आपसे सांतवां प्रश्न भी पूछना चाहता हूं कि भारत के मुसलमान तो भारत में रहना चाहते हैं, लेकिन पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान के हिंदू,सिख,इसाई, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोग वहां नहीं रहकर भारत क्यों पलायन कर रहे हैं? क्या आप इन सभी प्रश्नों के उत्तर दे सकते हैं ? आप एक बात को रट लगाकर बैठे हुए हैं कि यहां धर्मनिरपेक्षता और समता के कानून का उलंघन हो रहा है । क्या आप समता और धर्मनिरपेक्षता के पाठ सिर्फ भारत के लोगों को पढ़ायेंगे? दुनिया में पचास मुसलमानों के देश है,जरा वहां जाकर भी इस पाठ को पढ़ा दीजिए तो मैं मानूं कि आप इन्सान हैं? यह कहां का न्याय है कि आपके दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों के उपर अन्याय हो रहा है और आप उसे भलाई करने के बदले धर्म निरपेक्षता और भाईचारे का पाठ पढ़ा रहे हैं ? आपने कभी उनके उपर किए गए घोर अत्याचार का विरोध नहीं किए और चले पड़ोसी मुसलमानों को भारतीय नागरिकता दिलाने के लिए? अगर जिस दवाई के खाने से रोग ठीक नहीं हो, तो वैसे दवाई को खाना छोड़ दिया जाना चाहिए ।ठीक इसी प्रकार से भारत की धर्मनिरपेक्ष और समता के कानून से अगर हमारे दलित और पिछड़े वर्ग के लोग सुरक्षित नहीं रह सकते, तो ऐसे कानून में आग लगा देना चाहिए ।न रहेगा बांस,न बजेगी बांसुरी । आज भारत में धर्मनिरपेक्षता और समता के नाम पर हिंदुओं के साथ-साथ सिख,इसाई, पारसी जैन और बौद्ध धर्म के लोगों के साथ घोर अत्याचार पड़ोसी देश के मुसलमानों के द्वारा किए जा रहे हैं, लेकिन देशद्रोही नेता वोट पाने के लालच में पड़ोसी मुसलमानों को बचाने के लिए राष्ट्रीय नागरिक संशोधन अधिनियम को घनाघोर विरोध कर रहे हैं ।जिसको इस क़ानून को रोकने के कोई अधिकार नहीं है वे राज्य सभा से प्रस्ताव पास कर रहे हैं ।इन नेताओं को शर्म आनी चाहिए कि अपने देश में भी अपने लोगों के साथ किए गए अत्याचार का विरोध नहीं कर पा रहे हैं, तो ये नेता और क्या कर पायेंगे? सावधान । भारतीय जनता जाग चुकी है।अब भारत में देशद्रोही नेता के नाटक जनता बंद करेगी । आपको इस प्रश्न का मुंहतोड़ जवाब जनता अच्छी तरीके से देगी कि -पड़ोसी देश से आए हुए मुसलमानों को भारतीय नागरिकता देने की आवश्यकता क्यों है?

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