बसपा के राष्ट्रीय अध्यक्षा सुश्री मायावती देशद्रोही, दलित और संविधान विरोधी हैं ।

क्रांति न्यूज,( ब्यूरो प्रमुख)कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह :- गाजियाबाद । नागरिक संशोधन अधिनियम के संबंध में बसपा के राष्ट्रीय अध्यक्षा सुश्री मायावती ने कही थी कि पहले दृष्टि में यह कानून विभाजनकारी और भेदभाव से भरा हुआ है । उन्होंने कही थी कि पाकिस्तान में मुस्लिम भी ज्यादती ( अत्याचार) के शिकार हो सकते हैं । अतः नागरिक संशोधन अधिनियम के तहत घूसपैठी मुसलमानों को भारतीय नागरिकता प्रदान नहीं करना भी भेदभाव है । इसलिए केन्द्र सरकार नागरिक संशोधन अधिनियम के तहत बाहरी देशों से आए हुए मुसलमानों को भी भारतीय नागरिकता प्रदान करें । सुश्री मायावती ने ऐसा कहकर बहुत ही घटिया विचार ब्यक्त की है । इस विचार से साफ पता चलता है कि वे घोर दलित और संविधान विरोधी नेत्री हैं । सबसे पहले यह सोचने का विषय है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के सामाजिक समिति के रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंगलादेश में हिंदू,सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के लोगों के साथ वहां के मुसलमान घोर अत्याचार कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप गैर-मुसलमानों की आबादी कहीं तीन प्रतिशत, तो कहीं आठ प्रतिशत ,तो कहीं बिल्कुल हीं नदारत है । पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान में कहीं भी किसी मुसलमानों के साथ धर्म के आधार पर वहां के हिन्दुओं, ईसाइयों, पारसियों, बौद्धों, जैनियों और सिखों ने ज्यादती (अत्याचार) नहीं किए हैं, जबकि ठीक इसके विपरित मुसलमानों ने सभी प्रकार के अत्याचार गैर-मुसलमानों के साथ किए हैं । अगर वहां के मुसलमानों के साथ कोई ज्यादती (अत्याचार) होता भी है तो धर्म के कारण नहीं बल्कि सत्ता संघर्ष के कारण होता है । परंतु संता संघर्ष और धर्म के आधार पर किए गए ज्यादती (अत्याचार) में आसमान और जमीन का अंतर होता है । पाकिस्तान,बंगलादेश और अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर नव्बे( 90) प्रतिशत दलितों के साथ किए गए घोर अत्याचार से मायावती कोई मतलब नहीं है, लेकिन जिस पर कोई अत्याचार नहीं किए गए हैं, उसको लेकर नागरिक संशोधन अधिनियम को विभाजनकारी और भेदभाव से भरा हुआ बताना सिर्फ शैतानी करने के अलावा कुछ भी नहीं है । आप दलितों की चिंता नहीं करना चाहती हैं, इसलिए पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान के मुसलमानों के साथ सहानुभूति जताने की कोशिश करते हैं । अगर आप यह सोचते हैं कि ऐसा करने से भारतीय मुसलमान मुझे वोट देने लगेंगे तो इससे और ज्यादा बढ़िया होगी कि आप पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान में जाकर वहां की नागरिकता ग्रहण कर लीजिए और मुसलमानों पर किए जा रहे ज्यादती का विरोध करिए । इससे आपको यह फायदा मिलेगी कि आप बहुत जल्द हीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन जायेगी । लेकिन भारत में रहकर आप दलितों के साथ किए गए अत्याचार का विरोध नहीं कर सकते हैं तो आप देशभक्त कहलाने के लायक नहीं हैं । आप नागरिक संशोधन अधिनियम को संविधान विरोधी क्यों कहते हैं? क्या यह कानून लोकसभा, राज्य सभा और राष्ट्रपति के द्वारा पास नहीं है? जब सभी वैधानिक संस्थाओं के द्वारा यह कानून बना दिए गए और लागू भी कर दिए गए हैं, तो इसका विरोध आप किस कारण से कर रहे हैं ? अगर यह कानून गलत है तो आप क्यों नहीं सुप्रीम कोर्ट में नागरिक संशोधन अधिनियम के विरोध में याचिका दायर करते हैं? आपको ग़लत और सही का पता चल जाएगी। आप सिर्फ अपनी वोट बटोरने के चक्कर में दलितों के साथ किए गए घोर अत्याचार का विरोध नहीं करते हैं और जिस पर कोई अत्याचार नहीं किए हैं, उनके भलाई के लिए नागरिक संशोधन अधिनियम को विरोध करते हैं । अगर आपकी यही मानसिकता बनीं रहेगी , जो देशभक्त लोग आपको देशद्रोही, दलित विरोधी और संविधान विरोधी भी कहेंगे । आगे आने वाले दिनों में आप राजनीति में न घर के रहेंगे और न घाट के । इसलिए आप अहंकार छोड़कर सत्य एवं न्याय की राजनीति कीजिए,वरना आगे आने वाले समय में आप जनता की सहानुभूति बिल्कुल खो बैठेंगे ।

Translate »
क्रान्ति न्यूज - भ्रष्टाचार के खिलाफ क्रांति की मशाल