केला के पेड़ में एक बार फल लग जाये, तो उसमें दोबारा समझाने से नहीं बल्कि उस पेड़ को काटने से हीं फल लगेगा ।

क्रांति न्यूज,( ब्यूरो प्रमुख) कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह.. गाजियाबाद । आज कल जहां भी पढ़िए अथवा सुनिए तो विपक्षी पार्टी के नेता जो मन में सोचते हैं, उसे बिना भय के जनता के सामने बोल देते हैं ।जिसको दो लाइन किसी विषय पर शुद्ध रूप से लिखने नहीं आता है और न हीं शुद्ध रूप से बोलने- वह भी अपने आप को नेता समझने लगता है । यह बात बहुत हीं आश्चर्यजनक है क्योंकि ज्यादा तक नेता ऐसे हीं हैं । इससे भी सबसे बड़ी आश्चर्य की बात तो यह है कि जो पढ़े-लिखे नेता हैं, वे तो अनपढ़ नेताओं से भी ज्यादा बेकार हैं। वे बैठे-बैठे सोचते रहते हैं कि मैं तो बहुत ज्यादा होशियार हूं । मैं जो भी कहूंगा, वही सच है । बाकी,किसी नेता के बात को सच होने पर भी झूठे काटते- फिरते हैं । कुछ नेता मुख्य विषय से हटकर वे सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने के लोभ में जनता के सामने अनाप-शनाप बकते रहते हैं और सोचते हैं कि मुझे तो जनता पसंद करती हैं । जबकि अनाप-शनाप बकने वाले नेता से जनता दूरी बना लेती है । कुछ नेता तो वैसे भी हैं जो अपनी विचारों को जनता के सामने खुलकर प्रकट नहीं करते हैं ।वे सोचते हैं कि ऐसा कहने पर कहीं जनता मुझे पर नाराज़ न हो जाए।ऐसी स्थिति को देखते हुए वे बोलने के बजाय चुप हीं रहना पसंद करते हैं क्योंकि वे किसी भी धर्म व जाति के लोगों को दिल से दुःखी देखना नहीं चाहते हैं ।वे सबको मिलाकर अपने साथ लेकर चलना चाहते हैं, जिससे देश की भलाई हो । लेकिन जिस नेता को देश की भलाई से मतलब नहीं है, वे नेता मुख्य विषय पर बिना ज्ञान के जनता के सामने सच को झूठ और झूठ को सच बताने लगते हैं । वैसे नेता को देश के विकास से कोई लेना-देना नहीं है । वे सिर्फ जनता को वेवकूप बना कर सिर्फ किसी प्रकार से सता की कुर्सी प्राप्त करना चाहते हैं । वे समाज को जाति, धर्म और क्षेतर के नाम पर जनता को गुमराह करते हैं । वैसे नेताओं में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल,पं बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, कांग्रेस पार्टी के नेता सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन, समाजवादी पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, बसपा के पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जैसे अनेक नेता हैं जो अपनी नाकामी और अज्ञानता को छिपाकर जनता के सामने निर्लज्जता पूर्वक चतुर बनने का प्रयास करते हैं ।इन सभी नेता को भारतीय जनता सरसों के दाने भर भी पसंद नहीं करते हैं ।ये सब ऐसे नेता हैं जो देश को विकास की ओर ले जाने वाले माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह, माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और उतर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी जी जैसे अन्य नेताओं के मार्ग में रोड़ा फेंकते रहते हैं । वैसे नेताओं को क्या करना चाहिए? वैसे नेताओं के बारे में भगवान श्रीराम जी ने कहा था कि केला के पेड़ में एक बार यदि फल लग जाए, तो उसमें दोबारा फल समझाने से नहीं बल्कि काटने से प्राप्त होगा । अर्थात वैसे नेता जो देशहित में बाधा पहुंचाने के काम करते हैं तो उन्हें समझाने की कोशिश करना बेकार है । वैसे नेताओं को आतंकवादियों के समान सजा होना चाहिए तभी ये सब सुधरेंगे, अन्यथा नहीं ।

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