क्षत्रिय देश के रक्षक एवं महान् शासक थे ।

क्रांति न्यूज,( ब्यूरो प्रमुख) कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह. गाजियाबाद । आप सभी पंद्रहवें अंक में पढे थे कि श्री राम जी को सुग्रीव ने बताया कि रावण सूर्पनखा को अपहरण करके ले जा रहा था । तब श्री राम ने रावण को मारने की प्रतिज्ञा किए। इधर सुग्रीव भी रावण के मित्र और अपने बड़े भाई वाली के अत्याचार से पीड़ित होकर वहां रह रहा था । उन्होंने श्री राम जी से अपनी सभी बयथा( दुःख)की बात को बताया ।श्री राम ने सुग्रीव को सहायता देने का वायदा किए और बाली को प्रत्यक्ष जाकर मार गिराए । इसके बाद सुग्रीव किषिकंधा राज्य का शासक बना । इसके बाद सुग्रीव और हनुमान जी के साथ अनेक बन्दरों ने सूर्पनखा को खोजा करने लगे । अंत में हनुमान जी के द्वारा ‌सूपरनखा का‌ पता लगने पर श्री राम ने रावण को मार कर सूर्पनखा और रावण की पत्नी मंदोदरी के साथ पुष्पक विमान में बैठकर अयोध्या वापस आ गये । सीता जी को किसी ‌ने अपहरण नहीं किया था और नहीं उनकी अग्नि परीक्षा हुई थी । सीता निष्कासन की कहानी भी गलत है ।श्री राम जी के दो पुत्र लव और कुश हुए थे ।श्री राम की प्रथम पत्नी सीता, दूसरी सूर्पनखा और तीसरी मंदोदरी थी । इस प्रकार अत्याचारी रावण को पाप करने का भारी सजा भुगतना पड़ा ।श्री राम ने लक्ष्मण को कभी भी रावण से शिक्षा लेने के लिए नहीं भेजा था ।श्री राम ने रावण के द्वारा किसी प्रकार के कोई कर्मकांड नहीं करवाये थे । रावण पंडित नहीं, बल्कि महामूर्ख था क्योंकि वे भगवान को भी पहचान नहीं सका था।श्री राम चरित मानस में बहुत – सा प्रसंग क्षत्रियों के अपमानित करने के उद्देश्य से रावण समर्थकों ने लिखे है , जो व्यवहारिक कसौटी पर खरे नहीं हैं ।अब मैं इस कथा को यहीं विराम देते हुए समाप्त करता हूं । अगर किसी को मन में कोई शंका हो, तो वे हमारे नं 9718588378 पर संपर्क कर सकते हैं। मैं उनके सभी प्रश्नों का उचित उत्तर दूंगा । जय, जय,जय श्रीराम ।

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