सातवीं अनुसूची में CAA(नागरिक संशोधन अधिनियम) विषय केन्द्र सरकार का है ।

क्रांति न्यूज,( ब्यूरो प्रमुख) कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह. गाजियाबाद ।– केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने विधानसभा से नागरिक संशोधन अधिनियम के विरोध में प्रस्ताव पारित कर इसे केरल में लागू नहीं करने का पहली बार फैसला लिया है । उन्होंने ने भारतीय नागरिक संशोधन अधिनियम के विरोध में कहा था कि यह कानून धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है , जो धर्म के आधार पर भेदभाव करती है।इसी प्रकार से लोकतांत्रिक जनता दल के अध्यक्ष शरद यादव, तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष ममता बनर्जी, कांग्रेस पार्टी के नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव,आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष केजरीवाल एवं बहुजन समाज पार्टी के अध्यक्षा सुश्री मायावती ने नागरिक संशोधन अधिनियम को संविधान एवं मुस्लिम विरोधी बताये हैं । पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, पंजाब और केरल के मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क़ानून को अपने राज्य में लागू नहीं होने देंगे । इस क़ानून के अलावे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को भी भारतीय नेता रोक लगाने की मांग कर रहे हैं । समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव कह रहे हैं कि मैं एन. पी. आर.(राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) के फार्म को नहीं भरूंगा । सबसे पहले विरोध करने वाले नेतागण को यह विचार कर लेना चाहिए था कि जिस विषय को अपने राज्य से लागू नहीं करने का घोषणा अथवा प्रस्ताव पारित कर रहे हैं, क्या उस विषय को रोकने का अधिकार राज्य सरकार को भारत के संविधान में है? भारतीय संविधान के सातवीं अनुसूची में संतानवे(97) विषय पर रोक लगाने अथवा लागू करने का अधिकार सिर्फ संसद को है । भारतीय संसद को रक्षा, विदेश,रेल और नागरिकता से संबंधित कानून को रोक लगाने और लागू करने का अधिकार दिए गए हैं । इस विषय पर राज्य सरकार को भारतीय नागरिक संशोधन अधिनियम को रोक लगाने का अधिकार आपको कहां से मिला है ? क्या राज्य सरकार के मुख्यमंत्री संसद में प्रधानमंत्री हैं, जो भारतीय नागरिक संशोधन अधिनियम को रोक लेंगे ? जब यह अधिकार सिर्फ संसद को है, तो इस क़ानून को पुरे भारत में लागू करने का अधिकार भारत के प्रधानमंत्री को है । राज्य सरकार के मुख्यमंत्री को किसी प्रकार का कोई अधिकार नहीं है कि संसद के विषय को लागू करने से रोक दें । भारत में भारतीय नागरिक संशोधन अधिनियम को लागू करने से सिर्फ देशद्रोहियों को परेशानी है । इस क़ानून से नब्बे प्रतिशत दलित समाज के लोगों को फायदा है ।जो नेता भारतीय नागरिक संशोधन अधिनियम को रोक लगाने की मांग कर रहे हैं, वे सब दलित विरोधी हैं क्योंकि पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान में प्रताड़ित किए गए दलितों एवं अन्य धर्मों के लोग को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का कानून बनाया गया है ।जो नेता भारतीय नागरिक संशोधन अधिनियम के विरोधी हैं वे सभी- के -सभी दलित विरोधी, भारत विरोधी और संविधान विरोधी हैं ।जो नेता दलित विरोधी हैं,वे सभी पाकिस्तान के आतंकवादियों के समर्थक हैं । भारत में आतंकवादियों के लिए कोई जगह नहीं है । अतः देशद्रोही नेता को यहां मुसलमानों के हित के नाम पर हिंसा फैलाने का छूट कदापि भी नहीं दिए जा सकते हैं । मैं केंद्र सरकार से कहना चाहता हूं कि आप निर्भीक होकर भारतीय नागरिक संशोधन अधिनियम, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को देशभर में लागू कीजिए । मैं भी देखूंगा कि कौन माई के लाल हैं जो इस क़ानून को लागू करने से रोक दें? यह कानून सिर्फ संसद के अतिरिक्त किसी भी राज्य सरकार को हिम्मत नहीं है कि भारत के नागरिक संशोधन अधिनियम को लागू करने से रोक दें । जिसे जनता को वेवकूप बनाने का घमंड है, उसे भारत की जनता चूर- चूर कर देगी ।

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