● कैसे मनाऊ नया साल ●

मै कैसे मनाऊ नया साल मेरे लिए आज भी देश की हालत ऐसी है जो कल थी ,
आज भी वो भूखे बच्चे और वो भूखी माँ की पेट की कहानी अटल थी,

कैलेंडर की तरिक बदल जाने से किसी का वक़्त नही बदलता ,
हाँ नये साल वाले दिन भी उस गरीब का चरखा यूही है चलता ,

कभी कभी नजरे झुका लेता हुँ मै ये झूठी शान देखकर लोगो की ,
जो मिलती है आजादी घर से उनके वे दुरुपयोगो की ,

हाँ किसी दिन मेरे देश का भी नये साल का सूरज चमकेगा ,
जातिवाद और धर्मवाद हटकर इंसानियत का सूरज धडकेगा,

आज हम नये साल पर पार्टी करेगे लेकिंन आज भी कोई दाने दाने के मोहताज है ,
अभिराज आज भी अभिराज और घर मै ही बैठे नागराज है,

कैसे मनाऊ नया साल आज भी मेरे देश का लाल वो सीना तान खड़ा है,
हम है अपने घर मे और वो 0 डिग्री मे भी तूफानो और दुश्मन की गोली के आगे अड़ा है,

क्या नया साल है उस माँ का जिसने अपने बच्चे को अपने आगे मरते देखा है,
क्या है उस बाप का जिस्ने अपने परिवार को भिखरते देखा है ,

नये साल के लिए नये साल का होना जरुरी नही….
जरुरत है अंदर की हैवानीयत को खतम करने की ,
Or जरुरत है अंदर के इन्सान को जगाने की।

धन्यवाद!

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