ठंढ से तन ही नहीं मन भी सिकुड़ जाते हैं |

ठंढ से तन ही नहीं मन भी सिकुड़ जाते हैं |
ऊपर से कोहरे की मार
अंदर से कुढ़ जाते हैं |
लगता है थोड़ी सी ऊष्मा मिल जाती |
इन सर्द हवाओं में आस पास सुषमा मिल जाती
बैठ जाते शाम को दीवारों की ओट में
इन झुरमुटों से निकलकर
पेड़ों के चौड़े मोटे तने खोह में
जहाँ पवन ऊपर से तो गुजरता है
पर थम जाती है गति
उसकी वहाँ पत्तियों के विछोह में |
सूखी पत्तियों और डालियों से अलाव जला लेते
चने कहाँ तैयार होंगे
कम से कम आलू पका लेते
ठंढ़ में आग में पके आलू का स्वाद
मत पूछिए ,उसके सोन्हेपन का
क्या दुनियाँ भर के मसाले दे पाएँगे जबाब
बस नमक और मिर्च हों साथ
आलू भी इतना अचछा लगता है
हुआ मुझे पहली बार अहसास |
सह लेता है आलू ,कड़कती सर्दी की मार
जलकर वह करते हमसब में ऊष्मा का संचार
देता तन को ऊर्जा ,जिह्वा से टपक जाती लार

जाड़े का साथी बिना पानी के हो जाता तैयार

kranti news with Krishna Tawakya Singh

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