भारत में नागरिक संशोधन अधिनियम (CAA) देशहित के लिए अनिवार्य है ।

kranti news beauro , kavi anirudh kumar singh :- भारत को 1947 ई० में धर्म के आधार पर दो भागों में बंटबारा किए गए, जिसमें एक भाग भारत कहलाया और दूसरा भाग पाकिस्तान । फिर1971ई० में पाकिस्तान को श्रीमती इंदिरा गांधी के द्वारा दो भागों में विभाजित कर दिए गए, जिसमें एक भाग पाकिस्तान कहलाता है और दूसरा भाग बंगलादेश । अफगानिस्तान भी मुस्लिम प्रधान देश है । पाकिस्तान, बंगला देश और अफगानिस्तान देशों में मुस्लिम धर्म को राजकीय धर्म घोषित कर दिया गया है लेकिन भारत अभी धर्म निरपेक्ष देश कहा जाता है क्योंकि यहां हिन्दुओं के देश होने के बाद भी हिन्दू धर्म को राजकीय धर्म घोषित नहीं किया गया था । पुरी दुनिया में पचास से भी ज्यादा मुस्लिम देश है, लेकिन हिंदू प्रधान देश भारत धर्म निरपेक्ष देश है । जब धर्म के नाम पर मुसलमानों को पाकिस्तान और बांग्लादेश दे दिए गए थे, तब भी भारत के बहुत मुसलमान भारत में हीं रहना पसंद किए और पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिन्दू,सिख,इसाई, बौद्ध,जैन और पारसी भी रहना पसंद किए । बहुत गैर मुस्लिम धर्म के लोग अफगानिस्तान में भी रहना पसंद किए ।1950ई० में पाकिस्तान के नेता लियाकत अली और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पं० जवाहर लाल नेहरू के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे कि दोनों देशों में रहने वाले अल्पसंख्यक धर्म के लोगों को सभी प्रकार से सुरक्षा एवं सम्मान देंगे । लेकिन समझौते के बाद पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ वहां के मुसलमानों ने भारी अत्याचार करना शुरू कर दिए । पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के उपर इस प्रकार अत्याचार ढाये की, जिसके वर्णन करने में भी दुनिया के सभी लेखकगण थक( हार) जायेंगे । पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान में वहां के मुसलमानों ने हिंदू,सिख, बौद्ध,जैन,इसाई एवं पारसी धर्म के लोगों के साथ ऐसे बूरे व्यवहार किए, जिसे देखकर शर्म को भी शर्म आने लगती है । पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में गैर-मुसलमानों के उपर ऐसे अत्याचार ढाये जाने लगे, जिससे यहां के लोगों को रहना मुश्किल होने लगा ।घोर अत्याचार से पीड़ित गैर-मुसलमानों को वहां रहने के लिए सिर्फ तीन हीं रास्ते बचे थे । तीन रास्ते में पहली रास्ता यह था कि वे आत्महत्या करें; दूसरी रास्ता यह थी कि वे मुसलमान बन जायें और तीसरी रास्ता यह थी कि वे सब यहां से पलायन करके दूसरे देश चले जायें । कुछ गैर हिन्दू आत्महत्या कर के अपने जीवन लीला समाप्त कर लिए, लेकिन मुसलमान बनने के लिए तैयार नहीं हुए । बहुत-सा गैर-मुसलमानों को भय दिखाकर उसे मुसलमान बनने को मजबूर कर दिए। आज वहां बारह करोड़ के संख्या में रहने वाले अल्पसंख्यकों की आबादी घटकर तीन दशमलव सात प्रतिशत रह गये हैं । आज भी उन सभी पर मुसलमानों के द्वारा अत्याचार जारी है । जब वहां के गैर -मुस्लिम जो मुसलमान नहीं बनना चाहते थे, वे सब वहां अपने- अपने जमीन और संपत्ति को छोड़कर भारत में आकर शरणार्थी के जीवन जीने पर मजबूर हैं ।वे लोग वहां से अपने इज्जत एवं जीवन बचाने के लिए संपत्ति को छोड़कर विवशता में भारत आए हुए हैं । लेकिन पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान के शासकों ने वहां के गैर- मुसलमानों को मान-सम्मान एवं सुरक्षा के भार नहीं लिए और नहीं कभी कांग्रेस की सरकार ने आए हुए शरणार्थियों के प्रति दया की भावना दिखाई । पागल थी ऐसी कांग्रेस की पूर्व सरकार,जो ऐसी दयनीय स्थिति में गैर-मुसलमानों को भारतीय नागरिक बनाने के लिए लिए तैयार नहीं थे । साथ-ही-साथ 1955ई०के नागरिक अधिनियम भी कठोर थे, जिसे कांग्रेस की पूर्व केंद्रीय सरकार ने संशोधन करना उचित नहीं समझा । वे सिर्फ बाहरी मुसलमानों को भारत के अंदर रहने के लिए समर्थन करते रहे, जो आए दिन बम के धमाके से भारत के निर्दोष लोगों को प्राण लेने के साथ ही साथ आर्थिक क्षति भी पहुंचाते हैं । कांग्रेस की नेताओं को आतंकवादियों के हित की चिंता है परंतु पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान में गैर-मुसलमानों के साथ हुए अत्याचार को लेकर उन्हें थोड़ा भी दुःख नहीं है । धन्य है भारत की वर्तमान सरकार श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जी और भारत के गृह मंत्री श्री अमित शाह जी , इनके प्रयास एवं साहस के कारण1955 के बने नागरिक अधिनियम को राज्य सभा से 11/12/2019 ई० में नागरिक संशोधन अधिनियम(CAA) पास कराकर राष्ट्रपति को भेजा । भारत के राष्ट्रपति भी धन्यवाद के पात्र हैं, जिन्होंने नागरिक संशोधन अधिनियम को 12/12/2019ई० को अपनी हस्ताक्षर से देशहित में इस क़ानून को लागू करने में भरपूर सहयोग प्रदान किए । इस क़ानून के तहत सिर्फ पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान के मुसलमानों को भारत की नागरिकता नहीं दिए जायेंगे क्योंकि उन्हें वहां धर्म के आधार पर परेशान नहीं किए जाते हैं और न ही उनके उपर गैर-मुसलमानों के समान अत्याचार किए गए हैं । वे विदेशी मुसलमान भारत आकर आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं और विपक्षी दल के नेताओं को चुनावों में सिर्फ वोट देकर देशद्रोहियों की संख्या में वृद्धि करते हैं ।ऐसी स्थिति में भारत सरकार ने घूसपैठी मुसलमानों को जो पाकिस्तान,बंगलादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हुए हैं, उन्हें किसी भी स्थिति में भारत की नागरिकता प्रदान नहीं किए जायेंगे । भारत के गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने स्पष्ट कहा दिए हैं कि भारत के मूलनिवासी मुसलमानों की नागरिकता नहीं छीने जायेंगे ।जो भारतीय मुसलमान यहां के मुल निवासी हैं, उनके नागरिकता को खत्म नहीं किए जायेंगे ।जो नेता भारतीय मुसलमानों को ‌गुमराह करते हैं,वे पाकिस्तान के समर्थक हैं । वे देशभक्त नहीं ; बल्कि देशद्रोही है । वैसे देशद्रोहियों को पाकिस्तान की नागरिकता ग्रहण करने में हमारे देश की भलाई है ।जो लोग अथवा नेता विदेशी मुसलमानों को भारतीय नागरिक बनाने के पक्षधर हैं तो उन्हें इस प्रश्न का उत्तर देने चाहिए कि विदेशी मुसलमानों के लिए पाकिस्तान,बंगलादेश और अफगानिस्तान मुस्लिम राष्ट्र नहीं है? अगर तीनों मुस्लिम धर्म प्रधान देश है तब विदेशी मुसलमान वहां क्यों नहीं रहते हैं? अगर नेताओं को विदेशी मुसलमानों से बहुत प्रेम है तो वे पाकिस्तान,बंगलादेश और अफगानिस्तान के शासकों से कह दे कि आप सभी अपने देश को भारत में विलय कर दें, जिससे विदेशी मुसलमानों को भारतीय नागरिकता मिलना आसान हो जाएगा और फिर विपक्षियों को धरना – प्रदर्शन नहीं करना पड़ेगा । भारत में नागरिक संशोधन अधिनियम(CAA) देशहित में लागू करना अनिवार्य है ।

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