₹25 हजार की बेसिक सैलरी से भी बना सकते हैं ₹1 करोड़, जानें कैसे EMPLOYEE PROVIDENT FUNDसे

kranti news delhi , abhishek singh (reporter ):- नई दिल्ली. हर किसी के लिए रिटायरमेंट (Retirement Saving) के समय पर 1 करोड़ रुपये का संभव नहीं हो पाता है. अगर आपकी सैलरी बेहद ही कम है तो ये बिल्कुल भी आसान नहीं होगा. ऐसे में आपको इस बात क्या ध्यान रखना होगा कि आप अन्य तरीकों से भी रिटायरमेंट के लिए बचत करना शुरू कर दें. कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) द्वारा बचत पर ही पूरी तरफ से निर्भर नहीं रहा जा सकता है, क्योंकि इसमें बचत सीमित और मिलने वाला ब्याज भी अन्य विकल्पों से कम ही होता है.

क्या है PF का नियम
सैलरीड कर्मचारियों (Salaried Employee) के लिए, बेसिक सैलरी (Basic Salary) का 12 फीसदी हिस्सा कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में जाता है.
इतनी ही रकम नियोक्ता (Emplpoyer) की तरफ से भी जमा किया जाता है. हालांकि, आपके द्वारा जमा की गई पूरी रकम PF में नहीं जाता है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों के मुताबिक, नियोक्ता के योगदान का 8.33 प्रतिशत हिस्सा, जोकि अधिकतम 15,000 रुपये हो सकता है, ईपीएस में जाता है.

जबकि, बाकी का रकम पीएफ (Provident Fund) में जाता है. इसका मतलब है कि, अगर किसी की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से अधिक है तो हर महीने उनके EPS में 1,250 रुपये जमा होता है. GST Return पर नियम सख्त: जब्त हो सकता है बैं​क अकाउंट, रजिस्ट्रेशन कैंसिल होने की भी संभावना

मान लेते हैं कि किसी कर्मचारी की टेक-होम सैलरी (Take Home Salary) 60 हजार रुपये प्रति माह है और उनकी बेसिक सैलरी इसका 40 फीसदी है. इस हिसाब से उनकी बेसिक सैलरी 25,000 रुपये प्रति माह है.ईपीएस और ईपीएफ का ब्रेक—अप

बेसिक सैलरी – 25,000 रुपये
PF में कर्मचारी का योगदान – 12 फीसदी के हिसाब से 3,000 रुपये
EPS में नियोक्ता का योगदान – 8.33 फीसदी के हिसाब से 1,250 रुपये
PF में नियोक्त का योगदान – 1,750 रुपये (3,000 में से 1,250 घटाने के बाद)
हर महीने में PF में कुल योगदान – 4,750 रुपये

इस पर 8.5 फीसदी की ब्याज दर से मान लेते हैं कि कर्मचारी अगर 25 साल काम करने के बाद रिटायर होता है तो पीएफ में कुल बैलेंस करीब 50 लाख रुपये ही होगा. पीएफ पर ब्याज का मासिक रनिंग बैलेंस के आधार प कैलेकुलेट किया जाता है. यहां पर हमने सालान आधार पर रिटर्न कैलकुलेट किया है.

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अब 1 करोड़ रुपये के लक्ष्य से देखा जाए तो जमा रकम में 50 लाख रुपये की कमी है. इसके लिए कर्मचारी को 25 साल के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड (Equity Mutual Fund) में निवेश करना बेहतर होगा.

इसके लिए मान लेते हैं कि औसतन सालाना 12 फीसदी की दरे से ब्याज मान लें तो 25 साल के ​लिए हर माह 2,600 रुपये का निवेश करना होगा. इस प्रकार 25 साल की नौकरी पूरा करने के बाद 50-50 लाख रुपये एसआईपी और पीएफ रुपये बचाया जा सकता है.

इस प्रकार 25 साल की नौकरी करने के बाद 25,000 रुपये की बेसिक सैलरी के आधार पर भी रिटायरमेंट के समय पर 1 करोड़ रुपये जुटाया जा सकता है. साथ ही, आपको इस बात का ध्यान देना होगा कि आप जैसे-जैसे ही उम्र और अनुभव बढ़ता रहेगा, वैसे-वैसे ही आपका इनकम भी बढ़ता रहेगा. ऐसे में आप इस रकम को बढ़ाने के लिए अन्य सेविंग भी कर सकते हैं.

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