वो तो शायद मिल भी जाएँ जो बिछड़कर धरती पर ही रह जाते हैं |

वो तो शायद मिल भी जाएँ जो बिछड़कर धरती पर ही रह जाते हैं |
पर उन्हें कहाँ ढूँढ़ू जो आकाश में खो जाते हैं |
जिसकी न तो कोई सीमा है ,न हि कोई वीमा है |
बस प्रार्थना ही कर सकते हैं
शायद वहाँ तक आवाज पहुँच जाए
सुन ले वह जो सारी धरती और आकाश में रहता है
मुझे भी नहीं पता ,वह सुनता है
या कुछ कहता है |
कभी सुनी नहीं जिसकी आवाज
उसकी पुकार की आस लिए
व्योम में झाँकता हूूँ |
कहीं कोई उतर आए ,दिल में
रास्ते में न सही ,दिख जाए मंजिल में |

Krishna Tawakya Singh with kranti news

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