ग्रहण काल में साधना से मिलती है पितृदोष से राहत

kranti news editor desk :-विदित हो कि पौष कृष्ण पक्ष अमावस्या को अंग्रेजी तारीख 26 दिसम्बर 2019 को प्रातः 8 बजकर 17 मिनट से 10 बजकर 57 मिनट तक रहेगा।जिसका सूतक काल ग्रहण से 12 घण्टे पूर्व प्रारम्भ होगा दिनांक 25 दिसम्बर 2019 को शायं 5 बजकर 31 मिनट से तथा ग्रहण के पश्चात समाप्त हो जाएगा। आचार्य अरुन पाण्डेय के अनुसार पौष मास की अमावस्या को अपने पूर्व जन्म के प्रारब्ध से मुक्ति के लिए सूर्य पूजा की जाती है। तथा जिन जातकों की जन्मकुण्डली में सूर्यग्रहण दोष होता है।अथवा पितृ दोष से प्रभावित है वो सभी इस ग्रहण काल अवधि में पितृ दोष शान्ति भी करा सकते हैं। सामान्य रूप से सभी श्रद्धालुओं को इस समय में भोजन, मूर्ति स्पर्श, एवं रति क्रीड़ा निषेध का होता है। सभी श्रद्धालुओं को यथा संम्भव ब्रम्हचारी, व्रत, मौन, आध्यात्म साधना करने से निश्चित ही लाभ मिलता है। सामान्य उपाय में सप्त धान्य, अथवा जो आसानी से उपलब्ध हो उस धान्य एवं दक्षिणा को छलनी में रखकर घर के सभी सदस्यों के ऊपर 7 बार उतारा करने के बाद जोशी को दान करें। ग्रहण समाप्त होने के उपरान्त लाल मसूर की दाल, गुड़, लाल फल, गुलाब के पुष्प, लाल कपड़ा इत्यादि सूर्य से सम्बंधित बस्तुयें मन्दिर अथवा ब्राह्मणों को दान देने से पितृदोष एवं ग्रहण से राहत मिलती है।

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