अधिकारी चेयरमैन सभासद प्रधान के घर तक सीमित है अलाव की लकडिया

kranti news lucknow , editor desk :- अग्रेजो के जमाने का ही है अलाव जलाने का सरकारी बजट

ठंड से बचने के लिए यदि किसी ने अपना निजी पेड भी काटा तो उसे भुगतना पडता है डंड

रेलवे स्टेशन बस स्टाप अस्पताल चौराहा सार्वजनिक स्थलो पर नही जल सके अभी तक अलाव

बदलते परिवेश में भी सरकारे ब्रिटिश हुकुमत के कानून पर चल रही है

जबकि आजादी के 7 दशक बाद समाज में जरूरतो के साथ मंहगाई बढी है लेकिन सरकार जरूरत और मंहगाई को नही मानती है जिससे प्रशासनिक व्यवस्था समाज में मजाक बनकर रह गयी है। अग्रेजो के समय में ठंड से बचाव के लिए तहसीलो को 50 हजार रूपये की रकम लकडिया जलाने के लिए दी जाती थी सात दशक पूर्व का यह बजट आज भी सरकार ने लागू कर रखा है

गरीब कमजोर अभाव ग्रस्त लोग ठंड में ठिठुर रहे है। लेकिन काग्रेंस से लेकर सपा बसपा जनता पार्टी के साथ भाजपा की सरकारो में भी अलाव के बजट बढाने की ओर पहल नही की है। जिससे अलाव का बजट ऊट के मुॅह में जीरा साबित होता है।

बीते दो सप्ताह से ठंड बढ गयी है और दिनो दिन शीतलहर बढ रही है जिससे लोगो के हाथ कांप रहे है। गरीबो के पास ठंड से बचने के लिए संसाधन नही है दिसम्बर बीत रहा है लेकिन अभी तक तमाम दावा करने वाली सरकार के जिम्मेदारो ने गरीबो के बीच कम्बल वितरण नही किया है अधिकारियो का कहना है कि अभी तक कम्बल का बजट सरकार से नही मिल सका है। वही अलाव की भी व्यवस्था सरकारी नुमाइदो द्वारा नही की जा सकी है।

तहसील प्रशासन को जो अलाव के लिए सरकार से बजट मिले है उस बजट से अधिकारी के आवास नगर पंचायत अध्यक्ष अधिशाषी अधिकारी ग्राम प्रधान और सभासद के घर तक ही अलाव की लकडिया पहुच सकी है। तमाम प्रयास के बाद भी सार्वजनिक स्थल चौराहा अस्पताल बस स्टाप रेलवे स्टेशन और बाजार के अन्दर अलाव नही जलाया जा सका है। जिससे ठंड से लोग काप रहे है।

पूर्व के समय में ठंड बढने पर लोग अपने पेडो को काटकर लकडिया ले लेते थे और लकडियो को जलाकर अलाव बना लेते थे जिससे गरीब भी ठंड से बच जाते थे लेकिन अब सरकारी कानून ने पेडो को काटने पर पांबदी लगा दी है और केवल लकडी माफिया ही पेड काट पाते है और माफिया मंहगे दामो में लकडियो की बिक्री करते है जो गरीबो के बस की बात नही है।

ठंड से बचने के लिए यदि किसी गरीब ने अपना निजी जंगली पेड भी काट दिया तो उसके ऊपर सरकारी मशीनरी का पहाड टूट पडता है और वन विभाग पुलिस विभाग से लेकर विभिन्न विभागो के जिम्मेदार उस पर मुकदमा दर्ज कराने के साथ साथ दंड भी वसूलते है जिससे गरीब पेड काटने से भी अब बचने लगे है। अब ठंड से बचाव का क्या संसाधन है इसका जवाब योगी सरकार और उनके अधिकारियो के पास शायद नही होगा।

वही इसका उल्टा अधिकारी कर्मचारी और जनप्रतिनिधियो के घरो में बिजली उपकरणो से गर्मी पैदा कर ठंड से बचाव के तरीके अपना लिए जाते है लेकिन इन गरीबो का हमदर्द कौन है। यह बडा सवाल है और योगी सरकार को अलाव के नाम पर गांव गांव इतना बजट उपलब्ध कराना होगा। कि ठंड के दिनो में दो महीने गांव के कई हिस्सो में सरकारी धन से अलाव जलाया जा सके यही सच्ची मानवता होगी।

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