भोजपुरी पूर्वी लोकगीत – चले ठंडी बयरिया ये सजनी |

मुखड़ा – चले ठंडी बयरिया ये सजनी ,
कांपेला बंदनवा मोर |
जल्दी से भरीला अंकवरिया
लागेला जड़वा बड़ी ज़ोर |
चले ठंडी बयरिया ये सजनी ,
कांपेला बंदनवा मोर |
अंतरा 1 – सुना मोर अँखियाँ के पुतरी ,
भईले प्यार तोहसे मोर |
बिना तोहरे तरसे नजरिया ,
उठेला कर्जवा मे हिलोर |
चले ठंडी बयरिया ये सजनी ,
कांपेला बंदनवा मोर |
अंतरा 2 -पतरी कमरिया अँखिया बाड़ी कजरी |
चले न केवनों दिलवा पर ज़ोर |
हमके बना ला सजना ये गुजरिया |
संगे बांधीला जिंगीया के डोर |
चले ठंडी बयरिया ये सजनी ,
कांपेला बंदनवा मोर |
अंतरा 3 – हरदम रहा तू हमरे अँखियाँ के पजरी |
काहे भइलू तू करेजवा के कठोर |
बोली बोले हमके गाँव नगरिया |
निरखी तोहके जइसे चितवे चकोर |
चले ठंडी बयरिया ये सजनी ,
कांपेला बंदनवा मोर |

          श्याम कुँवर भारती [राजभर]
             कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,
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