उत्तर प्रदेश में एक ऐसा भी आंदोलन चल रहा है जो बेहद शांतिपूर्ण है.

लेखपाल आंदोलन

KRANTI NEWS SAHARANPUR , (BEAURO CHIEF ) NITIN DHANGAR :-उत्तर प्रदेश में एक ऐसा भी आंदोलन चल रहा है जो बेहद शांतिपूर्ण है.आंदोलन करने वाले कर्मचारी लेखपाल हैं..जिनके ऊपर आंदोलन में आने के बाद एस्मा भी लगा दिया गया है।

आखिर क्यों

grade pay..2000 है…जबकि उत्तराखंड में 2800 और हिमाचल प्रदेश में 3200 है. राजस्थान में भी 3200.जो समानता से बहुत दूर.इसलिए लेखपाल 2800gp की मांग कर रहे हैं इनका पद विशिष्ट पद माना जाता है ये टेक्निकल काम करते हैं।

एसीपी विशंगति- 30/11/94 से पूर्व सर्विस में आने वाले को 4200gp, व 1 /12/94 एक दिन के अंतर से नौकरी सुरु करने वाले को 2800 मिल रहे एक ही वर्ग में 2 उपवर्ग बन गए हैं इसे ठीक करने की मांग कर रहे हैं।

जब चतुर्थ श्रेणी का चपरासी नौकरी सुरु करता है 1900gp में व लेखपाल तृतीय श्रेणी में शुरू करता है 2000gp के साथ दोनों को 10 साल सेवा के बाद 2400gp मिलता है अर्थात तृतीय श्रेणी से लेखपाल चतुर्थ श्रेणी में आ जाता है इस व्यवस्था को बदलने के लिए संघर्षरत हैं लेखपाल

उत्तर प्रदेश में लेखपाल से प्रमोशन के बाद कानूनगो व उसके बाद नायब तहसीलदार बनते हैं परन्तु व्यवस्था ऐसी है कि 36 साल से अधिक सेवा करने के बाद प्रमोशन ही नहीं हुए हैं लेखपाल लेखपाल के ही पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं यह अत्यंत सोंचनीय है। इस लिए प्रमोशन के अवसर बढ़ाने के लिए काडर रिव्यु की मांग कर रहे हैं ।

100 rs प्रतिमाह हम लोगो को यात्रा भत्ता दिया जा रहा है जो लगभग 3.33 पैसे प्रतिदिन पड़ता है जो सोच और सुनकर हास्यपद लगता है.. आज के परिवेश में यह यात्रा भत्ता कितना उपयोगी होगा , मोटरसाइकिल में हवा भरने के लिए भी 5 से 10 रुपये लगते हैं। वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार भत्ते की मांग कर रहे हैं

100 rs स्टेशनरी भत्ता भी….3.33 पैसे प्रति दिन मिलता है…जिससे एक साधारण रजिस्टर और कलम भी नही खरीदी जा सकती है….

सबसे बड़ी बात कुल लगभग 32 हजार के सापेक्ष कुल 24000 कर्मचारी है…

और 8000 पद अभी रिक्त हैं….जिनका अतिरिक्त कार्य इन्ही को देखना और संभालना पड़ता है.. जिसका कोई अतिरिक्त भत्ता नहीं मिलता .

इनकी नियमावली भी बहुत पुरानी है इनकी नियमावली में आज भी लिखा है कि लेखपाल माह में एक दिन ही तहसील जाएगा परन्तु वर्तमान समय मे सप्ताह में 2 दिन तहसील पर हाजिरी होती है तहसील दिवस थाना दिवस आदि पर जाते हैं इसलिए राजस्व परिषद द्वारा बनाई नई नियमावली राजस्व उपनिरीक्षक नियमावली 2018 लागू कराने की मांग कर रहे हैं।

सबसे बड़ी बात इस आंदोलन की ये है…ये बेहद शांतिपूर्ण है…इसका प्रारम्भ प्रार्थना से होता है और शाम को अंत राष्ट्रगान के द्वारा किया जाता है…भारत माता की जय के नारे भी लगाए जाते हैं

इतने शांतिपूर्ण आंदोलन होने पर भी अभी हाल में कन्नौज के सभी लेखपालों को धरना स्थल से 4 बस में भरकर जेल ले जाने के बहाने पुलिस लाइन में दिनभर रक्खे तथा रात्रि में छोड़े व

कानपुर देहात में आंदोलन कर रहे कर्मचारियों..महिलाओं पर इस कड़ाके की ठंड में ठंडे पानी की बौछारें डाली गई हैं..आखिर सरकार बताए कि कोई अपनी मांगों कैसे रखे…..और अगर आंदोलन शांतिपूर्ण है तो फिर ….दमन क्यों..लोकतंत्र में सबको अधिकार है शांति पूर्वक आंदोलन करने के लिए ।

और इनकी जो मांगे है..उनको तत्कालीन मुख्यमंत्री व वर्तमान मुख्यमंत्री जब विपक्ष में थे गोरखुर के सांसद रहते हुए .. जायज ठहरा चुके है …पर अब जब सरकार में हैं..हैं तो इनको आंदोलन करना पड़ रहा है..

और बहुत से लोगों को बर्खास्त कर दिया गया है..और बहुत से लोगो को suspend कर दिया गया है..बगैर उनकी मांगों पर उनके नेतावों से बात किये ?…ये अनुचित है…..

ये वर्ग जमीनी स्तर पर ..ग्रामीण इलाकों में …..लगभग सारी योजनाओं में इनका सहयोग लिया जाता है…बाढ़ राहत हो..सूखाराहत..कोई भी चुनाव हो इनका सहयोग लिया जाता है..निर्वाचन प्रक्रिया में योगदान….आगजनी…की रिपोर्ट हो….कोई त्यौहार हो शांति व्यवस्था में इनका योगदान होता है…

….. दंगे के समय LIU का काम करते हैं लोगों को समझाते हैं
.राजस्व विभाग की इन्हें रीढ़ कहा जाता है, dm से ज्यादा जनता इनपर विश्वास करती है ऐसा एक पूर्व IAS ने कहा है , गांव का DM भी इन्हें लोग कहते हैं ।लेखपालों ने फिर भी अपनी माँगो को लेकर 2016 से लेकर आजतक समय समय पर आंदोलन किया .

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