माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश लगातार 22 साल तक ब्रितानी हुकूमत के अधीन रहा

शताब्दी वर्ष मना रहे माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के इतिहास में पन्नों में उपलब्धियों के साथ-साथ कई सुनहरी यादें भी दर्ज हैं। यूपी बोर्ड की स्थापना के बाद इसकी कमान लगातार 22 साल तक ब्रिटिश सरकार के पास रही। हालांकि आजादी के पूर्व ही बोर्ड को अध्यक्ष व सचिव के रूप में भारतीय अधिकारी मिल गए थे। 

1921 में इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम पारित होने और एक अप्रैल 1922 को भारत सरकार की ओर से अधिनियम लागू किए जाने के बाद पहली बार 1924 में अंग्रेज अधिकारी एएच मैकेंजी बोर्ड के पहले सभापति अर्थात अध्यक्ष नियुक्त हुए। उनके सभापति नियुक्त होने से पहले ही 1923 में माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से पहली बोर्ड की परीक्षा हुई थी। बोर्ड के सभापति को माध्यमिक शिक्षा विभाग का निदेशक कहा जाता है, वर्तमान में इस पद पर विनय कुमार पांडेय 2018 से कार्यरत हैं।
पहले पांच अध्यक्ष अंग्रेज अधिकारी रहे
यूपी बोर्ड की स्थापना के बाद 1924 में इसके पहले सभापति ब्रितानी हुकूमत के एएच मैकेंजी नियुक्त हुए। वह इस पद पर लगातार 10 वर्ष 1934 तक रहे। बोर्ड में इसके बाद 1935 से 1937 तक एचआर हैरप को सभापति नियुक्त किया गया। 1937 से 1939 तक आरएस बेयर, 1939 से 1943 तक जेसी पालब्राइट एवं 1943 से 1946 तक डब्ल्यू जीपी वाल को माध्यमिक शिक्षा परिषद का सभापति नियुक्त किया गया। 
चुन्नी लाल साहनी 1946 में बोर्ड के पहले भारतीय सभापति बने
देश को आजादी मिलने से पहले ही 1946 में भारतीय अधिकारी चुन्नी लाल साहनी को बोर्ड का सभापति नियुक्त किया गया। चुन्नी लाल साहनी 1949 तक इस पद पर रहे। इनके बाद 1949 से 1951 तक सुधीर कुमार घोष को इस पद पर नियुक्त किया गया, वह 1951 तक सभापति रहे। यूपी बोर्ड के सभापति के पद पर अब तक कुल 44 अधिकारी नियुक्त हो चुके हैं। यूपी बोर्ड में चार बार शिक्षाधिकारी संजय मोहन सभापति के पद पर तैनात रहे। वह पहली बार 2001 से 2007 तक बोर्ड के सभापति रहे। इसके बाद वह तीन बार बहुत कम समय के लिए बोर्ड के सभापति नियुक्त किए गए। 
बोर्ड के पहले सचिव अभय चरन मुखर्जी, 38 वें दिव्यकांत शुक्ल
माध्यमिक शिक्षा परिषद की 1921 में स्थापना के बाद 1922 में बोर्ड के पहले सचिव भारतीय शिक्षाधिकारी अभय चरन मुखर्जी बने, वह इस पद पर लगातार 1934 तक बने रहे। दूसरे सचिव 1934 में सईद उद्दीन खां बने। वह इस पद पर 1937 तक रहे। बासुदेव यादव, अमर नाथ वर्मा के अलावा प्रभा त्रिपाठी भी दो बार सचिव रहीं। 1922 से लेकर अब तक यूपी बोर्ड के कुल 38 सचिव नियुक्त हो चुके हैं। शताब्दी वर्ष में यूपी बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल हैं।

Translate »
क्रान्ति न्यूज लाइव - भ्रष्टाचार के खिलाफ क्रांति की मशाल