क्षत्रिय देश के रक्षक एवं महान् देशभक्त थे । इस समाचार के आठवें भाग यहां से पढ़िए–…-

क्रांति न्यूज, ब्यूरो प्रमुख, कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह के द्वारा–..–..–गाजियावाद(उ.प.) क्षत्रिय समाज के महानायक व मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जी के उपर चौथे आरोप लगाया जाता है कि वे दुश्मनों के उपर छिपकर वार(आक्रमण) करते थे । क्षत्रिय विरोधी लेखक- पत्रकार कहते हैं कि जब श्री राम भगवान थे, तो वाली के सामने आकर युद्ध क्यों नहीं किए? मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान कहलाने वाले श्री राम ने धोखे से वाली को क्यों मारे थे? क्या महान् पुरूष दूसरे वीर को धोखा देकर मारते हैं? …….
। कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह—- क्षत्रिय कभी भी किसी के उपर धोखा से आक्रमण नहीं किया करते हैं । किसी को भी नियमानुसार पहले समझाया जाता है । जब समझाने के बाद भी जो लोग नहीं समझते हैं, तब उनको चेतावनी दिए जाते हैं । अगर उन पर चेतावनी का भी कोई असर नहीं पड़ता है, तब उसे अपराध के अनुसार दंड दिए जाते हैं ।श्री राम जी ने नियमानुसार सुग्रीव के कहने पर वाली को बहुत समझाये थे, लेकिन वाली ने श्री राम जी के एक भी बात को नहीं माने । तब श्री राम जी ने नियमानुसार भारी अपराध के कारण वाली को सीधे धनुष वाण से मार गिराए ।श्री राम ने वाली को छिपकर नहीं, बल्कि खुलकर सामने आकर वाण से मारकर प्राण लिए । इसमें श्री राम जी का कोई अपराध नहीं था क्योंकि शास्त्र भी कहता है कि शठे शाठयम समाचरेत अर्थात दुष्ट के साथ दुष्टता करना हीं अच्छा है ।श्री रामचरितमानस में वाली प्रसंग में श्री राम जी के द्वारा छिपकर वाली को मारने की कहानी रावण के ‌समरथकों ने लिखकर जोड़ें हैं, ताकि रावण और वाली को निर्दोष साबित किया जा सके । कोई भी क्षतरिय छिपकर आक्रमण नहीं किया करते हैं क्योंकि क्षत्रिय मर सकते हैं, लेकिन वे दुश्मनों से छिपते नहीं बल्कि उससे सीधे टकराते हैं । छिपकर और धोखा देकर वार करना तो कायर एवं रावण समर्थक करते हैं । इस समाचार के नौवां भाग बाद में पढ़िए ………………………….जय,जय,जय श्रीराम ।

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