मैं तेरी चाहत को तोलना चाहता हूँ |

मैं तेरी चाहत को तोलना चाहता हूँ |
तेरी मुस्कुराहट को मापना चाहता हूँ |
तेरे मन में उठते भावों को भाँपना चाहता हूँ |
तेरे जिस्म से उठती उष्मा को तापना चाहता हूँ |
देखना चाहता हूँ मैं तेरी आँखों में असर
जब तुम ले रही होती है अंगड़ाईयाँ
तब ये मालूम करना चाहता हैं अभी कितना है कसर
कसना चाहता हूँ तुझे अपनी बनायी कसौटी पर
वही काजल लगाना लगाना चाहता हूँ तुझे
निशान हैं मेरी अंगुलियों के जिस कजरौटी पर
हर तरफ से आश्वश्त होना चाहता हूँ |
यह कैसा खेल है ,इसमें अनुरक्त होना चाहता हूँ
कुछ तेरे बारे में ,किस्से सुने हैं
वही तो तुमसे सुनना चाहता हूँ |
तुम्हारी हकीकत से रूबरू हौने का ख्याल आता है
इसलिए मेरे मन में सवाल आता है |
तुझे क्या पता तेरे नहीं होने का कितना मलाल होता है | — kranti news with Krishna Tawakya Singh

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