यादों के आईने कभी धुंधले नहीं होते

यादों के आईने कभी धुंधले नहीं होते
न उसपर मैंने कभी धूल जमने दी
जब पड़े धूल के एक कण
मैंने अपने हाथों से उसे हटा दिया
हल्के से |
कहीं आपके गालों पर खरोंच न आ जाए |
कहीं आपके बालों में समाकर वो
सिरदर्द का कारण न बन जाएँ
जब कभी उस आईने में देखता हूँ आपकी तस्वीर
उसी तरह निर्मल ,कोमल ,कजल
दिखता है
जैसा पहली बार देखा था
उस आईने को मैं सीने में लिए फिरता हूँ |
वह आईना है तेरी यादों का
उसपर अंकित हैं तेरे मेरे वादे
जो हमने अबतक एक दूसरे से किए हैं
प्यार के उन पलों में ,जब कुछ याद नहीं रहता
बस मेरी आँखों मे वही तस्वीर नाच जाती है |
जब पहली बार तेरे कानों में मैंने वह कहा था ,बरसों इंतजार के बाद
बहुत हिम्मत करके
मुझे भी डर था ,कहीं तेरे न कहने का
हिम्मत नहीं थी मुझमें तेरा इनकार सहन करने का |
जान में जान आयी थी
जब तुम मुँह फेरकर हल्के से मुस्कुरायी थी |
झटके से ही सही ,जब तूने पहली बार नजर मिलायी थी |

— kranti news with Krishna Tawakya Singh

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