क्यों ऐसा है !

क्यों ऐसा है !
क्यों ऐसा है ,जो तुम सुनना नहीं चाहते
मैं वही कहना चाहता हूँ |
जिस घर के दरवाजे तूने बँद कर रखे हैं |
उसमें ही मैं रहना चाहता हूँ |
क्यों ऐसा है जो तुम मुझसे छुपाते हो
मैं वही देखना चाहता हूँ |
तुम दूर जाना चाहते हो
मैं तुम्हें पास लाना चाहता हूँ |
तुम्हें तो मुझसे कोई मतलब नहीं
फिर क्यों तुम्हारे आँखों में आँसू भर आते हैं |
जब मैं तुमसे जुदा होने की बात करता हूँ |
अभी दो कदम बढ़े भी नहीं
तुम्हारी सिसकियों की आवाज कानों में आ जाती है |
पीछे मुड़कर देखा ,तुम टकटकी लगाए देखते हो
दूर जाते हुए मुझे
वो आँसू जो अबतक आँखों में थे
गालों पर टपक आये हैं
मैं खुद को नहीं रोक पाता
मेरे आँखों में भी आँसू भर आएँ है
मैं भी कहाँ तुमसे दूर जाना चाहता हूँ
रोना आ जाता है जब तुमसे दूर जाने के लिए कदम बढ़ाता हूँ |
तुम चेहरा छुपाकर आँसू बहा लेते हो
मैं आँसुओं को छुपाकर मुस्कुराता हूँ |
पता है मुझे भी तेरे दिल का हाल
पता नहीं तुम क्यों मुझसे छुपाना चाहते हो |
जब तेरे हाथ मेरे हाथों में आए थे
तेरी धड़कनें सब सुना गयी थी
यह तो मुझे भी पता नहीं
तुम मुझे कब भा गयी थी |
ऐसा क्यों है
तेरे मना करने के बाद भी
मैं तेरे पास ही आ जाता हूँ |
तुम्हें याद करता ,तुझमें ही खो जाता हूँ |
तुम मुझे मना करते ,मैं तुम्हीं को मनाता हूँ | — kranti news with Krishna Tawakya Singh

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