नजरों से तीर न चलाइये हुजुर

नजरों से तीर न चलाइये हुजुर
आपकी पलकों में आके हम बस जाएँगे |
घायल हुआ अगर मेरा जिगर
आपकी आँखों से आँसू बरस जाएँगे
खेल नजरों से ही आपने खेला है अबतक
आपकी नजरों से मोती चुरा लेंगे
कस लीजिए अपनी कमर
हम रजर आप पर भी घुरा लेंगे
मत देखिए मुझे पीछे मुड़ मुड़ के
यहाँ कदम कदम पर हैं काँटे गड़ जाएँगे |
अभी तक जो नहीं था
दर्द बेतहाशा बढ़ जाएँगे |
चाहत जो अबतक दिल मे ही थी
अचानक ही आँखों मे चढ़ जाएँगे
प्यार क्या है
आपको भी हो जाएगी खबर
जब आप भी मन से मचल जाएँगे | —- Krishna Tawakya Singh

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