आपको कभी जीवन में देख पाऊँगा , नहीं जानता

आपको कभी जीवन में देख पाऊँगा
नहीं जानता
पर याद रहेगा आपका दिल में बैठकर मुस्कुराना |
कभी भूलेंगे नहीं हम आपके इन चंचल नैनों का आना जाना |
याद आएँगी आप ,
चाहे पड़े कभी आपको भूल जाना
न जाने क्यों कुछ रिश्ते
ऐसे ही बन जाते हैं
बिन देखे ,बिन जाने
जीने नहीं देते
एक तड़प ,एक बेचैनी सी हो जाती है मन में
देखने को उन्हें
जिन्हें मैं जानता हूँ
नहीं हैं आसपास
पर दिखते हैं हर पर
मन के आँगन में
परछाई की तरह
जिन्हें छू नहीं सकता
न तो देख सकता हूँ
पर वो हैं
यही महसूस करता हूँ
हर घड़ी हर पल उन्हें
अपने मन के आंगन में
मुस्कुराते हुए
पास बुलाता हूँ
पर वो नहीं आते
न जाने क्यों
दूर से ही हँसते हैं
मेरी नादानियों पर
पीछे भागता हूँ
पर अबतक पकड़ नहीं पाया
शायद उन्हें अहसास है
मुझसे दूर जाने का | — Krishna Tawakya Singh

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