तहसील लालकुआं में तैनात पटवारी ने लगाया उच्चाधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप, कहा नियमों की अनदेखी कर किया जा रहा है स्थानांतरण

ऐजाज हुसैन ब्यूरो उत्तराखंड

लालकुआं, नैनीताल। तहसील लालकुआं में तैनात पटवारी इकबाल अहमद ने अपने उच्च अधिकारियों पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा कि नियमों की अवहेलना कर उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनका रजिस्ट्रार कानूनगो के पद पर पदोन्नति करते हुए उन्हें नैनीताल तहसील भेजने की कार्यवाही सभी नियमों को ताक पर रखकर की जा रही है। पटवारी ने कागजी पत्रों को दिखाते हुए कहा कि 19 अक्टूबर 2020 को पदोन्नति करते हुए उन्हें रजिस्टार कानूनगो बनाकर तहसील नैनीताल भेजने के जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के बाद 1 दिन के अंदर ही 20 अक्टूबर को तहसीलदार लालकुआं नितेश डांगर द्वारा बिना उपजिलाधिकारी हल्द्वानी के अनुमोदन के ट्रांसफर लिस्ट जारी कर दी गई, जिसका पत्राचार भी नियमों के विरुद्ध हुआ है। हालांकि वह मेडिकल पर छुट्टी पर थे जिसके बाद उन्होंने 11 नवंबर को आदेश रिसीव किया जिसमें उन्होंने खुद को पर्वतीय सेवा के लिए अस्वस्थ होने की जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व में हुई सड़क दुर्घटना के कारण उन्होंने अपना स्वास्थ्य मेडिकल कराया जिसमें वह पहाड़ी क्षेत्र में कार्य करने के अनुकूल नहीं हैं। अब उच्च अधिकारियों द्वारा दबाव बनाते हुए उन्हें तत्काल तहसील लालकुआं से अवमुक्त कर नैनीताल में कार्यभार ग्रहण करने का दवाब बना जा रहा है। पटवारी ने बताया कि उक्त आदेश के खिलाफ उनके द्वारा उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर कर रखी है और उच्च न्यायालय ने इस मामले में उच्चाधिकारियों से 3 सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। वहीं उन्होंने बताया कि तहसीलदार लालकुआं द्वारा इस बीच उन पर जबरन दवाब बनाते हुए अवमुक्त करने की कार्यवाही की जा रही है। पटवारी के मुताबिक नियमानुसार ट्रांसफर के दौरान 15 दिन का समय विभाग द्वारा और ट्रांसफर होने वाले व्यक्ति द्वारा अपरिहार्य स्थिति को देखते हुए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया जाता है लेकिन उन सभी नियमों को ताक पर रखकर तहसीलदार लालकुआं द्वारा यह कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय में यह मामला विचाराधीन है और उसका जो भी निर्णय होगा वह उन्हें मान्य होगा बावजूद इसके उनका मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है।
वहीं इस मामले में लालकुआं उपजिलाधिकारी ऋचा सिंह का कहना है कि मेरे संज्ञान में यह मामला है, यदि पटवारी को कोई भी समस्या थी तो उसको पूर्व में बताना चाहिये था। साथ ही स्थानांतरण होने या पदोन्नति में नियुक्ति नहीं चाहिये थी तो उनको मेरे या उच्च अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिये थी। उन्होंने बताया कि उक्त पटवारी ने लिखित में अपना एक प्रार्थना पत्र दिया है जिसको उनके द्वारा जिलाधिकारी महोदय के समक्ष भेज दिया गया है। इस मामले में जिलाधिकारी या उच्च न्यायालय द्वारा जो भी आदेश आयेंगे उसका पालन किया जायेगा।

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