धर्म और अधर्म क्या है? (द्वितीय भाग)

क्रांति न्यूज चैनल, ब्यूरो प्रमुख-कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह.

गाजियाबाद।10/11/2020. आप सभी ने प्रथम भाग पढ़कर समझ लिए हैं कि धर्म और अधर्म क्या है? इसके बाद मानव के और क्या- क्या धर्म (कर्तव्य) है?हर मनुष्य को अपने जीवन में क्या करना चाहिए? इस प्रश्न के संबंध में गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्री रामचरितमानस में लिखे थे कि :- बड़े भाग्य मानुष तन पावा,सुर दुर्लभ संतजन गावा। अर्थात मानव शरीर बहुत ही भाग्य से मिलता है। ऐसा सत्य वचन देवता, स़ंत और शास्त्र कहते हैं। अब प्रश्न यह उठता है कि तब हम सभी मनुष्यों को संसार सागर से पार करने के लिए क्या करना चाहिए? इस प्रश्न के उत्तर में महान कवि गोस्वामी तुलसीदास जी कहते थे कि “मानव तन धरे के फल यह भाई, राम भजहीं सब काम विहाई” अर्थात मनुष्य शरीर पाने के पश्चात हम सभी को सभी विषय वासनाओं ( कामनाओं) को त्याग कर श्री राम (परमात्मा) को भजन करना चाहिए। यानी हर मनुष्य को श्रीराम जी के आदर्श मार्ग पर चलना चाहिए। आगे गोस्वामी तुलसीदास जी ने यह भी बताये थे कि”आगम निगम पुराण अनेका,पढ़े लिखे का फल प्रभु एका। तव पद पंकज प्रीती निरंतर,सब साधन कर यह फल सुंदर।”अर्थात सभी मनुष्यों को आगम -निगम और पुराण पढ़ने के बाद सबसे पहले काम भगवान के चरण- कमलों में निरंतर (हमेशा)प्रेम रखना चाहिए। यह कार्य सभी कार्यों से सुंदर (बहुत बढ़िया) हैं। इसलिए वे आगे कहते थे कि “प्रवेश नगर कीजे सब काजा, ह्रदय राखिए कोशलपुर राजा”। अर्थात सभी मनुष्यों को किसी भी नगर या शहर में कार्य शुभारंभ करते समय अपने ह्रदय में कोशलपुर राजा श्री रामचंद्र भगवान जी का नाम अवश्य सुमिरन करते रहना चाहिए। अब प्रश्न यह है कि श्रीराम जी के नाम का सुमिरन ह्रदय में क्यों करते रहना चाहिए? आप इस प्रश्न का उत्तर तीसरे भाग में पढ़िएगा। जय जय जय श्री राम। http://krantinews.co.in/archives/21431 धर्म और अधर्म क्या है? (प्रथम भाग) – क्रान्ति न्यूज अब आप की अपनी भाषा 105 भाषाओं में में ताजा खबरों के लिए लॉगिन करे – www.krantinews.co.in पर

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