भारत में ये पांच बॉलीवुड फिल्में ‘बैन’ कर दी गईं , रिलीज पर मच गया था हंगामा

भारत के थिएटर्स में रिलीज होने वाली हर फिल्म को पहले सेंसर बोर्ड के सामने से गुजरना होता है। सेंसर बोर्ड इस फिल्म को देखता है और अगर कुछ इसमें विवादित लगता है तो उसे मेकर्स से हटाने के लिए कहा जाता है। फिल्म को इसके बाद कैटेगरी सर्टिफिकेट दिया जाता है। फिर कहीं जाकर फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हो पाती है। लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसी फिल्मों के बारे में बताएंगे जिनपर इतना हंगामा हुआ कि उन्हें भारत में बैन कर दिया गया।

अनफ्रीडम
इस लिस्ट में सबसे पहले नाम आता है फिल्म ‘अनफ्रीडम’ (Unfreedom) का। इस फिल्म का निर्माण साल 2014 में किया था। इसे इसलिए बैन कर दिया गया क्योंकि यह समलैंगिक रिश्तों पर आधारित थी। फिल्म में ज्यादा अश्लीलता होने के वजह से सेंसर बोर्ड ने इसे रिलीज करने की मंजूरी नहीं दी थी।

फायर
दीपा मेहता के निर्देशन में बनी फिल्म ‘फायर’ दो महिलाओं के समलैंगिक रिश्तों पर आधारित थी। यह मध्यवर्गीय परिवार में उन दो महिलाओं की कहानी थी जो रिश्ते में देवरानी और जेठानी होती हैं और एक दूसरे के प्रति आकर्षित हो जाती हैं। कई संगठनों से इस फिल्म का विरोध किया था, जिसके चलते इस पर बैन लगा दिया गया।

द पेंटेड हाउस
इस फिल्म में एक बुजुर्ग शख्स और एक लड़की के बीच संबंधों को दिखाया गया था। साल 2015 में बनी इस फिल्म को लेकर काफी बवाल मचा था। फिल्म में अश्लील कंटेंट होने के चलते इस पर बैन लगा दिया गया। हालांकि यूट्यूब पर अब भी इस फिल्म के कुछ सीन दिखाई दे जाते हैं।

सिंस
साल 2005 में आई फिल्म सिंस यशराज बैनर तले बनी थी। फिल्म की कहानी एक जवान लड़की और पादरी के प्रेम प्रसंग पर आधारित थी। इस फिल्म को लेकर ईसाई धर्म के लोगों ने आपत्ति जताई थी। इसी वजह से फिल्म पर बैन लगा दिया गया।

वाटर 
दीपा मेहता की फिल्म ‘वाटर’ में विधवा महिलाओं के जीवन से जुड़ी स्याह दुनिया को दिखाया गया है। इस फिल्म को अकादमी अवॉर्ड 2007 के लिए नॉमिनेट भी किया गया। लेकिन विवादों में आने कारण इसे बैन कर दिया गया।

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