बुनकरों की समस्या को लेकर प्रियंका गांधी ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र

फ्लैट रेट पर बिजली देने की योजना को समाप्त कर बुनकरों के साथ नाइंसाफी कर रही है सरकार: प्रियंका गांधी

कोरोना माहमारी और सरकारी नीतियों से बुनकरों का कारोबार चौपट, मदद करे सरकार: प्रियंका गांधी

पूरी दुनिया में मशहूर बनारसी साड़ियों के बुनकरों के परिवार दाने-दाने को मोहताज: प्रियंका गांधी

दिल्ली/लखनऊ, 29 अक्टूबर 2020। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव प्रियंका गांधी ने यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी को बुनकरों की समस्याओं को लेकर पत्र लिखा है। पत्र में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बुनकरों को फ्लैट रेट पर बिजली देने की योजना को पुनः बहाल करने की मांग को प्रमुखता के साथ उठाया है।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पत्र में लिखा है कि मेरी जानकारी में आया है कि पिछले कुछ समय से वाराणसी के बुनकर बहुत ही परेशान और हताश हैं। पूरी दुनिया में मशहूर बनारसी साड़ियों के बुनकरों के परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं।

उन्होंने पत्र में लिखा है कि कोरोना महामारी और सरकारी नीतियों के चलते उनका पूरा कारोबार चौपट हो गया है जबकि उनकी हस्तकला द्वारा सदियों से उत्तर प्रदेश का नाम रौशन हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार को इस कठिन दौर में उनकी पूरी सहायता करनी चाहिए।

यूपी की प्रभारी महासचिव प्रियंका ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम लिखे पत्र में कहा है कि यूपीए सरकार ने 2006 में बुनकरों के लिए फ्लैट रेट पर बिजली देने की योजना लागू की थी। मगर आपकी सरकार यह योजना खत्म करके बुनकरों के साथ बहुत नाइंसाफी कर रही है।

कांग्रेस महासचिव में पत्र में लिखा है कि सिर्फ इतना ही नहीं बुनकरों ने मुझे बताया कि मनमाने बिजली बिल के खिलाफ जब वे हड़ताल पर गए तो सरकार ने उन्हें वार्ता के लिए बुलाया। सरकार के प्रतिनिधि ने उन्हें भरोसा भी दिलाया कि उनकी मांगें मान ली जाएंगी। लेकिन इसके बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान करने का कोई प्रयास नहीं हुआ।

महासचिव प्रियंका गांधी ने पत्र में बुनकरों की तीन प्रमुख मांगों को उठाया है:

  1. फ्लैट रेट पर बिजली देने की योजना बहाल की जाए।
  2. फर्जी बकाया के नाम पर बुनकरों का उत्पीड़न तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
  3. बुनकरों के बिजली कनेक्शन न काटे जाएं। जो बिजली के कनेक्शन कट गए हैं उन्हें तत्काल जोड़ा जाए।
Translate »
क्रान्ति न्यूज - भ्रष्टाचार के खिलाफ क्रांति की मशाल