क्षत्रिय देश के रक्षक एवं महान् शासक थे । इस समाचार के पांचवें भाग यहां से पढ़िए ——

( क्रांति न्यूज, ब्यूरो प्रमुख कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह के द्वारा ) गाजियाबाद :- आज मैं आप सभी के सामने सबसे पहले जगतपति भगवान श्री राम के उपर लगाए गए आरोप ( शिकायत) के संबंध में सच्चाई बताने जा रहा हूं , जिसे आप सभी गौर से पढ़िए। मैं श्री राम पर आरोप लगाने वालों का प्रश्न आपके सामने रख रहा हूं । इनके प्रश्नों के साथ ही उसका उत्तर भी मैं स्वयं दिया हूं, जिससे श्रीराम विरोधी का मुंह बंद हो ‌सके । कुछ लेखक- पत्रकार वाल्मीकि रामायण के आधार पर भगवान श्रीराम के उपर आरोप लगाते हैं कि वे शूद्र विरोधी थे । विरोधी लोग कहते हैं कि श्री राम ने जाति के कारण शूद्र ऋषि शंबुक को अकारण क्यों मारे ?….
कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह- वाल्मीकि रामायण में जिस शंबुक वध की घटना का वर्णन मिलता है,वह घटना बिल्कुल निराधार एवं असत्य है क्योंकि आज तक किसी ने भी इस घटना के आधार पर यह नहीं बताया है कि अगर ऋषि शंबुक जी शूद्र थे, तो उनकी जाति क्या है? अगर किसी को उनकी जाति हीं नहीं पता है, तब उनको कोई शूद्र कैसे कह सकते हैं? शूद्रों की करीब छः हजार से भी ऊपर जातियां हैं । मुझे कोई भी यह बताइए कि छः या सात हजार जातियों में ऋषि शंबुक जी किस जाति से संबंधित हैं? परंतु यह प्रश्न पूछने पर श्री राम विरोधी के मुंह बंद हो जाते हैं । जब शंबुक जी के बारे में किसी को भी जाति हीं नहीं पता है, तब आप बिना जाति के शंबुक जी को शूद्र कैसे कह सकते हैं? जब शंबुक जी शूद्र हीं नहीं है, तो श्री राम जी शूद्र ऋषि के हत्यारा कैसे हो ‌गये ? इस प्रकार वाल्मीकि रामायण में यह घटना बिल्कुल सही नहीं है । वाल्मीकि जी ने सिर्फ युद्ध कांड तक रामायण लिखे थे, बाकी उत्तर कांड तो श्री राम विरोधी ने जोड़कर रामायण में शामिल कर दिए थे, जिससे कि श्री राम के जीवन चरित्र वदनाम हो जाए । जबकि सच्चाई यही है कि श्री राम ने आज तक किसी भी व्यक्ति को जाति के नाम पर नहीं मारे हैं । अतः क्षत्रिय विरोधी बिना समझे हीं वैज्ञानिक क्यों बनते हैं? इस समाचार के छठा भाग बाद में पढ़िए—————————- जय,जय,जय श्री राम

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