भ्रष्टाचार के मुख्य कारण और निवारण (समाधान) के उपाय क्या हैं?(18वां भाग)

क्रांति न्यूज चैनल,ब्यूरो प्रमुख-कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह.

गाजियाबाद।दि०27/10/2020. आप सभी ने भाग 17वां पढ़कर समझ लिए हैं कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने “ढोल गंवार शूद्र पशु नारी,सकल ताड़ना के अधिकारी” लिखकर किसी को भी दिल दु:खाने के कार्य नहीं किए थे,लेकिन आज के समय में विभाजनकारी शक्तियों के द्वारा बिना समझे हीं रामचरितमानस पर मिथ्या आरोप लगाते रहते हैं। आज के समय में भारत को सबसे ज्यादा खतरा पाकिस्तान और चीन से नहीं बल्कि जातिवादी मानसिकता से ग्रसित लोगों से हैं। यहां बहुत हीं दु:ख एवं आश्चर्य की बात यह है कि जो लोग जातिवादी व्यवस्था के खिलाफ बोलते और लिखते हैं, वे सब हीं जातिवाद को मिटाने के लिए पूरी मन से तैयार नहीं हैं। जो लोग मानवता, भाईचारा,समता, स्वतंत्रता और न्याय की बात करते हैं, वे हीं लोग जातिवाद के पोषक बने हुए हैं। यहां चुनाव से लेकर न्याय तक की यात्रा जातिवाद के नाम पर किए जा रहे हैं। हमारे देश में वैसे नक़ली नायकों को महापुरुष,बाबा और भगवान कहकर पूजते हैं। जिसने जातिवाद को तोड़ने के बजाय जातिवाद को संरक्षण प्रदान करने का काम किए हैं, उन्हें लोग अपने जाति का मसीहा कहकर ग़ौरव महसूस कर रहे हैं। क्या कोई सच कहने को तैयार हैं कि जो लोग भारत में समता और मानवता को स्थापित करना चाहते हैं तो भारतीय संविधान के द्वारा लोगों को जाति और वर्ग के प्रमाण पत्र क्यों बनाये जा रहे हैं? जिस नेता को अगर जातिवाद से वास्तव में नफरत है तो वे सबसे पहले जाति के नाम से मिलने वाले आरक्षण और न्याय को बंद कराने के लिए सरकार पर दबाव क्यों नहीं बनाते हैं? सिर्फ जाति- वाद के उपर कोसने (निंदा करने) से काम नहीं चलने वाला है। हमारे देश में अधिकांशतः नेता ऐसे हीं हैं जो जन्म पर आधारित व्यवस्था को मिटाने के लिए बड़े-बड़े भाषण तो देते हैं, परंतु भारतीय संसद से जातिवाद को मिटाने के लिए प्रस्ताव पास नहीं कराते हैं। भारत के नेता दो नावों पर सवार होकर काम करते हैं। वे सब एक ओर तो जातिवाद को मिटाने की बात भी करते हैं तो दूसरी ओर जाति के नाम पर आरक्षण की लाभ लेने से नहीं हिचकते हैं। आखिर यह कहां का न्याय है कि जाति के नाम पर ऊंच जाति के गरीब लोगों को आरक्षण के लाभ देने से वंचित किए जाते हैं तो दूसरी ओर जाति के नाम पर एस.
सी, ओबीसी और एसटी के धनी लोगों को आरक्षण दिए जाते हैं? अगर किसी को सरकारी सहायता देना हो तो जाति के नाम पर क्यों दिए जाते हैं? अगर जाति के नाम पर सरकारी सहायता देना भी है सभी जातियों के ग़रीब लोगों को क्यों नहीं दिए जाते हैं? क्या सामान्य वर्ग के गरीब , अन्य वर्ग के गरीबों से अलग होते हैं? क्या भगवान गौतम बुद्ध और महावीर स्वामी ने जाति के नाम पर सरकारी सहायता देने के संबंध में कोई संदेश दिए थे? अगर देखा जाए तो भारतीय संविधान जाति के नींव पर खड़ी है, जिसे भारतीय नेता क्यों नहीं मिटाते? भारत को जातिवाद से मुक्ति के लिए सबसे पहले भारतीय संविधान को जातिनिरपेक्ष बनाने की अतिशीघ्र आवश्यकता है। इसके लिए मैं सभी भारतवासियों से अपील करना चाहता हूं कि देश में एकता और भाईचारे की स्थापना हेतु भारतीय संविधान में जातिनिरपेक्ष कानून को शामिल करने के लिए शांति पूर्वक भारत सरकार पर दबाव बनाने के लिए विशाल जन आंदोलन करने का कष्ट करें। http://krantinews.co.in/archives/20414 भ्रष्टाचार के मुख्य कारण और निवारण(समाधान)के उपाय क्या हैं?(17वां भाग) – क्रान्ति न्यूज अब आप की अपनी भाषा 105 भाषाओं में में ताजा खबरों के लिए लॉगिन करे – www.krantinews.co.in पर विशेष बाद में पढ़िएगा।

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