भ्रष्टाचार के मुख्य कारण और निवारण(समाधान)के उपाय क्या हैं?(17वां भाग)

क्रांति न्यूज चैनल,ब्यूरो प्रमुख-कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह.

गाजियाबाद।दि०25/10/2020. आप सभी ने 16वां भाग पढ़कर समझ लिए हैं कि हम सभी पशुओं को सेवा, सुरक्षा और प्रेम प्रदान कीजिए, जिससे वे सब भी सुखी हो सकें। अब मैं आप सभी के सामने नारी के विषय पर कुछ लिखने जा रहा हूं, जिसे आप गौर पूर्वक पढ़ने का कष्ट कीजिए। आप जानते हैं कि नारी सबसे पहले सम्मान, सेवा और सुरक्षा के हकदार हैं क्योंकि इनके बिना तो सृष्टि हीं निराधार है। इसलिए शास्त्रों में कहा गया है कि “यत्र पूज्यते भार्या, तत्र रमंते देवता।यत्र न पूज्यते भार्या,तत्र न रमंते देवता।”अर्थात जहां नारियों की पूजा होती हैं, वहीं देवता भी खुश होते हैं और जहां नारियों की सम्मान नहीं होती हैं, वहां देवता भी नाराज़ हो जाते हैं। अतः नारी सर्वथा,सब जगह और सर्व समय के लिए पूजनीय हैं। इसलिए शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि “मातृवत परदारेषु, परदब्येषु लोष्टवत ।आत्मवत सर्वभुतेषु, य: पश्यति स: पण्डित:”अर्थात यह बताया गया है कि पराई नारियों को भी मातृवत (माता के समान) समझना चाहिए। जो ऐसा सम्मान नारियों को देते हैं, वे सच में पंडित कहलाने के अधिकारी हैं। जैसे श्री रामचन्द्र जी ने शवरी को भामिनी (माता) कहकर संबोधित किए थे। इसके विपरित रावण ने माता सीता जी को पत्नी के नज़र से देखते थे। लेकिन श्रीराम और रावण के दृष्टि में नारी को देखने और समझने में काफी अंतर है।इस दृष्टि से तो श्री राम जी पंडित और रावण महामूर्ख कहलाने के अधिकारी हैं। फिर भी रावण समर्थक रावण को महापंडित कहकर मिथ्या प्रचार करते रहते हैं, जिन्हें स्वयं पंडित की परिभाषा भी मालूम नहीं है। जिसने कभी नारी का सम्मान करने का ज्ञान नहीं हो, उसे महापंडित कहकर पुकारने वाले स्वयं भी रावण जैसे महामूर्ख हैं। हमारे प्राचीन शास्त्रों में वर्णन है कि पुरुषों के नाम के पहले नारी के नाम सबसे पहले लिखे और बोले जाते थे, लेकिन आज की परम्परा में नारियों की पहिचान पति के नाम से होने लगे हैं। पहले लक्ष्मी नारायण, उमाशंकर, सीता राम, राधे कृष्णा,लक्ष्मीपति, उमाकांत, उमाशंकर, उमापति, सियावर रामचन्द्र जैसे नामों में सबसे पहले नारियों के नाम शामिल हैं, लेकिन राम, नारायण, शंकर,पति,वर , कांत और कृष्ण नारियों के बाद में ही बोले और लिखे जाते थे। पहले ज्ञान की देवी सरस्वती,बल की देवी दुर्गा और धन की देवी लक्ष्मी का पहले स्थान प्राप्त हैं। लेकिन आज क्या हो रहा है हमारे देश में नारियों के साथ? ये बात किसी को भी बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि इस बात से सभी लोग पहले से ही भलीभांति परिचित हैं। लेकिन फिर भी लोगों की आचरण में सुधार नहीं हो रहे हैं। हमारे देश में हर कोई जानते हैं कि नारियों के साथ दुर्व्यवहार के कितने भयंकर परिणाम होते हैं, फिर भी नारियों के साथ गलत करने से डरते नहीं है। इसलिए आज के समय में नारियों को दुष्टों की नजर और अत्याचार से बचाने के लिए मर्यादा की आवश्यकता होती है।आज घर – घर में मर्यादा के ज्ञान कम सिखाये जाते हैं। नारियों के साथ भेदभाव किए जाते हैं। लड़की और लड़का के साथ दो प्रकार के व्यवहार किए जाते हैं। नारियों को घर और बाहर में किस नजर से देखना चाहिए, उसे सभी भूलते जा रहे हैं। सभी मर्यादा की सीमा को लांघकर नारियों के साथ अन्याय कर रहे हैं। ऐसी स्थिति होने पर समाज में नारियों के सम्मान, सुरक्षा और सेवा के लिए संस्कार सिखाने की घोर आवश्यकता है। जबतक श्री राम जैसे महामानव नहीं होंगे तो समाज में आए दिन नारियों पर अत्याचार होते रहेंगे। अतः नारियों के सम्मान के लिए घर से बाहर तक संस्कार के पाठ पढ़ाया जाना चाहिए,तभी नारी सुरक्षित रह सकतीं हैं। इसीलिए गोस्वामी तुलसीदास जी ने नारी को भी ताड़ना के अधिकारी बताये हैं। अर्थात नारी को भी अपनी सुरक्षा और सम्मान पाने के अधिकार है। अतः हम सभी का पावन कर्तव्य है कि नारी को सम्मान की नजर से देखें,तभी समाज में शांति और सुख प्राप्त होंगे। http://krantinews.co.in/archives/20374 भ्रष्टाचार के मुख्य कारण और निवारण (समाधान) के उपाय क्या हैं?(16वां भाग) – क्रान्ति न्यूज अब आप की अपनी भाषा 105 भाषाओं में में ताजा खबरों के लिए लॉगिन करे – www.krantinews.co.in पर शेष भाग बाद में पढ़िएगा।

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