भ्रष्टाचार के मुख्य कारण और निवारण (समाधान) के उपाय क्या हैं? (15वां भाग)।

क्रांति न्यूज चैनल ,ब्यूरो प्रमुख-कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह.

गाजियाबाद.आपने 14 वां भाग पढ लिए । अब आपके सामने शूद्र वर्ण के बारे में कुछ बात बताने जा रहा हूं। आप सभी सबसे पहले यह जानिए कि ‘शूद्र’ का मतलब क्या होता है? शास्त्रों में शूद्र के संबंध में कहा गया था कि “जन्मना शूद्र जायते च कर्मणा द्विज उच्चयते । “अर्थात सभी जन्म से शूद्र (अनाड़ी) होते और कर्म से द्विज (ब्राह्मण) होते हैं। लेकिन कबीरदास जी ‘शूद्र’ शब्द के संबंध में कहते थे कि” एक हीं हड्डी एक हीं गुदा, कौन ब्राह्मण और कौन शूदा?”अर्थात सभी मनुष्यों में एक हीं जैसे हड्डी और मांस होते हैं तो फिर ब्राह्मण और शूद्र अलग-अलग कैसे हुए? कुछ विद्वानों के अनुसार “मिट्टी के घड़े की आकाश और सोने की घड़े के आकाश में क्या अन्तर हैं?”अर्थात शूद्र और ब्राह्मण में कुछ भी भेद नहीं हैं। ऐसे शुद्र के बिषय में अलग-अलग विचार हैं। कुछ लोग यह कहते हैं कि शूद्र हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार यह चौथे वर्ण मानें जाते हैं। शास्त्रों के मुताबिक शूद्र वर्ण का कर्तव्य तीनों वर्णों का सेवा बताये गए हैं। लेकिन कुछ का मत(विचार) यह हैं कि क्षत्रिय वर्ण से विभाजित होकर चौथे वर्ण शूद्र बने हैं। अर्थात पहले तीन हीं वर्ण थे, लेकिन बाद में कुछ क्षत्रियों ने ब्राह्मणों के बात नहीं माने, जिसके कारण ब्राह्मणों ने कुछ विरोधी क्षत्रियों को चौथे वर्ण शूद्र बना दिए। शूद्र के विषय पर भिन्न-भिन्न मत(विचार) हैं। लेकिन आधुनिक समय में इसे एस.सी(अनुसूचित वर्ग) के नाम से जाने जाते हैं, जिसमें शूद्र वर्ण के विभिन्न जातियां शामिल हैं। आज के समय में कुछ लोग यह कहते हैं कि ‘श्री रामचरितमानस’ में शूद्रों के संबंध में गलत चौपाई लिखे गए हैं कि”ढोल गंवार शूद्र पशु नारी,सकल ताड़ना के अधिकारी।”यहां लोग शूद्र के विषय पर ताड़ना का मतलब मारने -पीटने का अर्थ लगाते रहते हैं, जिससे अनुसूचित वर्ग के लोगों की श्रद्धा श्री राम जी के प्रति कम होते जा रहे हैं। लेकिन अनुसूचित वर्ग के कुछ लोगों का यह विचार बिल्कुल गलत हैं क्योंकि यहां शूद्रों को ताड़ना के अधिकारी कहने का मतलब मारने -पीटने से नहीं हैं। यहां गोस्वामी तुलसीदास जी को कहने का भाव यह था कि शूद्र वर्ग के लोग अनाड़ी (अशिक्षित) होने के कारण मानसिक परिश्रम की अपेक्षा शारीरिक परिश्रम अधिक करते हैं। वे सब भले हीं अशिक्षित हो, लेकिन देश व समाज का आर्थिक विकास अनुसूचित जाति (शूद्र वर्ण) के कारण हीं हैं। अतः गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं शूद्र जाति के लोगों को सम्मानित करें और उन्हें देश के विकास का आधार मानते हुए उन्हें सुरक्षा प्रदान करें। उन्हें कोई हेय दृष्टि से नहीं देखें क्योंकि श्रमिक वर्ग (शूद्र वर्ण) हीं देश के विकास का आधार है। अतः हम सभी का कर्तव्य है कि उनके कार्यों को अत्यधिक महत्व देते हुए उन्हें दिल से सम्मान करते हुए उत्साह बढायें । उन्हें अशिक्षित समझकर उपहास अथवा नीचा समझने की कोशिश नहीं करना चाहिए।हर लोगों को यह समझना चाहिए कि हम शूद्रों(श्रमिकों) के बल पर चारों ओर विकास कर रहे हैं। अतः उनके द्वारा किए गए सभी कार्यों को दिल और दिमाग से सराहना करते हुए सम्मानित करें जिससे उनके मनोबल सदैव गर्व से ऊंचा रहे। वे सभी सम्मान और इज्ज़त के पात्र हैं, जिसके कारण हम सुखी जीवन व्यतीत करते हैं। अतः वे सब (शूद्र समाज के लोग) ताड़ना (प्रतिष्ठा) के अधिकारी (हकदार) हैं। अतः आप सभी नम्र निवेदन यह है ताड़ना शब्द का अर्थ शूद्रों के मारने – पीटने के अर्थ में कदापि भी नहीं लेना चाहिए क्योंकि वे सब (शूद्र वर्ण के लोग) तारीफ के काबिल हैं।http://krantinews.co.in/archives/20050 भ्रष्टाचार के मुख्य कारण और निवारण ( समाधान)के उपाय क्या हैं? (14 वां भाग ) – क्रान्ति न्यूज अब आप की अपनी भाषा 105 भाषाओं में में ताजा खबरों के लिए लॉगिन करे – www.krantinews.co.in पर शेष भाग बाद में पढ़िएगा।

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