भ्रष्टाचार के मुख्य कारण और निवारण ( समाधान)के उपाय क्या हैं? (14 वां भाग )

क्रांति न्यूज चैनल,ब्यूरो प्रमुख-कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह.

गाजियाबाद.दि०20/10/2020.आप सभी 13वां भाग पढ़कर जानकारी प्राप्त कर लिए कि ढोल को किस प्रकार से बजाना चाहिए? अब आप ‘गंवार’ के संबंध में थोड़ा जानकारी प्राप्त कर लीजिए। आप गंवार का मतलब क्या समझते हैं? जो व्यक्ति व्यवहारिक रूप से सक्षम नहीं हो अर्थात जो समय और समाज के अनुसार नहीं चलता हो, उसे गंवार समझा जाता है। जो समाज के नैतिक नियमों व मर्यादा के अनुसार नहीं चलते हों, वे व्यक्ति गंवार समझे जाते हैं। अगर इस दृष्टि से देखा जाए तो आज हमारे देश में गंवारों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुए हैं। आज हर व्यक्ति अपने आपको चालाक समझता है, लेकिन कोई भी व्यक्ति अपने आपको गंवार कहलाना पसंद नहीं करते । लेकिन कुछ व्यक्ति के व्यवहार हीं ऐसे होते हैं जिससे लोग उसे गंवार कहने लगते हैं। ऐसे गंवार व्यक्ति से समाज में नैतिकता और मर्यादा के हानि होने लगते हैं। समाज के हर अच्छे लोग उससे नफ़रत करने लगते हैं। ऐसी स्थिति में समाज के समझदार लोगों को यह समझना चाहिए कि उनकी गलती की वजह (कारण) क्या है? अगर आप गहराई से विचार कर उनके कमजोरी को पता करेंगे,तब आप यह जान पायेंगे कि इनके कमजोरी के मुख्य कारण अज्ञानता है। अतः समाज के समझदार लोगों का कर्तव्य है कि उनके कमजोरी (अज्ञानता) को पहचानकर उसे धीरे-धीरे दूर भगाने के प्रयास करते रहना चाहिए। जैसे भगवान गौतम बुद्ध ने अंगुली माल डाकू को प्रेम और ज्ञान से गंवारपन ( मूर्खता) को दूर करने में सफल हुए। इस प्रकार से किसी भी गंवार व्यक्ति को स्नेह और ज्ञान से दिल और दिमाग में परिवर्तन किए जा सकते हैं। यही बात गोस्वामी तुलसीदास जी कहना चाहते हैं कि गंवार व्यक्ति को हेय दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। अगर उनकी कमजोरी को ताड़कर (समझकर) दूर करने का प्रयास करें तो वे व्यक्ति अनैतिक और मर्यादा विहीन विचार और व्यवहार को त्याग कर समाज और राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं। जैसे रामायण के आदि कवि वाल्मीकि के जीवन में कैसे परिवर्तन हुए? अगर नारद मुनि जी वाल्मीकि जी के गंवारपन (अज्ञानता) को प्रेम और ज्ञान से नहीं समझाते, तो आज वे महान नहीं बन पाते। ठीक इसी प्रकार से हमें गंवार व्यक्ति को मजाक नहीं बनाकर उनके साथ आदर-सत्कार के साथ व्यवहार करें तो यह उनके साथ किए गए आचरण ही ताड़ना के समान है।इस प्रकार के व्यवहार को गलती नहीं, बल्कि सही मानने से समाज को लाभ -हीं-लाभ हैं। http://krantinews.co.in/archives/19975 भ्रष्टाचार के मुख्य कारण और निवारण (समाधान) के उपाय क्या हैं?(13 वां भाग) – क्रान्ति न्यूज अब आप की अपनी भाषा 105 भाषाओं में में ताजा खबरों के लिए लॉगिन करे – www.krantinews.co.in पर विशेष चर्चा में पढ़िएगा।

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