भ्रष्टाचार के मुख्य कारण और निवारण (समाधान) के उपाय क्या हैं?(13 वां भाग ]

क्रांति न्यूज चैनल,ब्यूरो प्रमुख-कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह.

गाजियाबाद.दि०19/10/2020. आपने 12 वां भाग पढ़कर समझ गए हैं कि किस प्रकार से असमाजिक तत्वों के लोगों ने श्रीरामचरितमानस में चौपाइयों से गलत अर्थ निकाल कर भगवान श्रीराम जी को भी बदनाम करने से भी नहीं डरते हैं। इसलिए वैसे लोगों के बारे में स्वामी विवेकानंद जी ने एक बार कहा था कि”समुद्र में डुबकी लगाने से मोती नहीं मिले, तो समुद्र को रत्नहीन नहीं समझना चाहिए क्योंकि हो सकता है कि डुबकी लगाने वाले को ठीक से डुबकी लगाने नहीं आया हो।”आज के समय में भी कुछ मूर्ख लोगों पर स्वामी विवेकानंद की विचार बिल्कुल सच साबित होते हैं।श्री रामचरितमानस में एक चौपाई है:- ढोल गंवार शूद्र पशु नारी,सकल ताड़ना के अधिकारी। कुछ विकृत मानसिकता के खास नेता और लेखक इस चौपाई का गलत अर्थ निकाल कर अनुसूचित जाति के लोगों को श्रीराम के विरुद्ध में भड़काते रहते हैं। लेकिन सच तो सच होता है और झूठ तो झूठ हैं हीं। किसी पागलों के द्वारा सोना को चांदी कह देने से सोना चांदी नहीं हो जाते हैं क्योंकि सोना तो सोना है किन्तु चांदी तो चांदी हैं हीं।(Gold is gold but not is silver and silver is silver but not is gold.) यहां ऊपरलिखित चौपाई का वास्तविक अर्थ क्या है? कुछ लोग यहां ताड़ना का मतलब पीटने या मारने से लगाते हैं। किंतु शब्दों का यह अर्थ गलत है। ताड़ना शब्द का अर्थ है- समझकर (समझना). गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा था कि ढोल कमजोर होने के कारण इसे जोर – जोर से पीटकर या मारकर बजाने से खत्म(बर्बाद) हो जायेगा। इसलिए इसे समझकर (परखकर) और सुरक्षा देते हुए बजाना चाहिए, जिससे ढोल ख़राब नहीं हो सके। अगर इस ढोल को अनुभवहीन मनुष्य बजायेगा तो ढोल कमजोर होने के कारण खराब हो जायेगा। इसलिए गोस्वामी तुलसीदास जी कहते थे कि ढोल को ताड़ना (सोच -समझकर) बजाने के अधिकारी (जरूरत) है। अगर इस ढोल को अनुभवहीन मनुष्य मनमानी तरीके (बिना समझे हुए) से बजायेंगे तो ढोल सुरक्षित नहीं रह पायेगा। इसलिए ढोल को सुरक्षित करने के लिए इसे समझकर और आदर -सत्कार के साथ बजाने से सभी मनुष्यों को सुनने में आनंद प्राप्त होंगे। अतः किसी को यह भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने ढोल को ताड़ना के अधिकारी बताकर गलती कर दिए।भाई साहब , गलती तो उसे मानना चाहिए जिसे समझ में नहीं आता हो। लेकिन कोई शब्द का अर्थ गलत लगाते हैं तो यह उनका पागलपन के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है। विशेष चर्चा बाद में पढ़िएगा।http://krantinews.co.in/archives/19758 भ्रष्टाचार के मुख्य कारण और निवारण (समाधान) के उपाय क्या हैं? [12 वां भाग ] – क्रान्ति न्यूज अब आप की अपनी भाषा 105 भाषाओं में में ताजा खबरों के लिए लॉगिन करे – www.krantinews.co.in पर

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