प्रधान की राजनीति में उबर सकता है एक गरीब चेहरा

तहसील संवाददाता असलम अली

सियासत अंतत: सियासत ही होता है जिस प्रकार सभी राजनीतिक दल अपनी सियासत की मोहर जातिगत समीकरणों के आधार पर बिछाते हैं जहां एक और देश में वोटर अपनी विकास कार को देखकर ध्यान में रखते हुए वोट करता है वहीं राजनीतिक दल अब प्रचार प्रसार जात पात को छोड़कर विकास का तथा सामाजिक कार्य को ध्यान में रखते हुए वोट करता है वही ग्राम सभा बरम भारी कि लडखाडाती राजनीति में जहां समान व पिछड़ी जाति तथा अनुसूचित जाति के राजनेता अपना अपना जोर जमाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं वहीं समाजसेवी नेता निसार खान उर्फ जुगनू समाज सेवा कई वर्षों से और खासकर लॉकडाउन में लोगों के सुख दुख में काम आते रहे वही उनकी अबचर्चाएं ग्राम सभा में बढ़ती नजर आ रही है ग्राम सभा के अभिभावकों का कहना है कि जिस तरीके से निसार उर्फ जुगनू नेक काम किया है गरीब मजलूम के साथ रात दिन खड़े रहते हैं वही प्रधान के टक्कर में हैं और जिस तरीके से युवाओं को समाज का कार्य तथा लोगों के सुख-दुख में युवाओं को जोड़ कर लोगों की मदद की है युवा उनके भक्त हो गए हैं इस बात का इशारा करता है कि इस चुनाव में ग्राम सभा को एक समाज सेवा कार्य करने वाला प्रधान मिलेगा राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हुए निसार उर्फ जुगनू ने बताया कि 24 घंटे सातों दिन में जनता की सेवा करता हूं करता रहूंगा और मुझे जनता के हित में जो भी कार्य हो सकेगा मैं करने का पूरा प्रयास करूंगा

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