मेरा क्या है !

kranti news
Krishna Tawakya Singh
मेरा क्या है !
न तो कोई मेरी मोहब्बत है
न कोई मेरा हमराज
बस अपने से ही दे लेते हैं
अपने दिल को आवाज
किससे करूँ शिकायत
कौन सुनेगा मेरी
सबकी सुनता रहता हूँ
कोई क्यों करेगा मेरी परवाह
ये शब्द हैं ,जो तुझ तक पहुँचते हैं
इसमें भाव अपने डालकर
तुम इसे अपनाते हो |
कौन जान पाता है मेरे भावों को
दुनियाँ बस देखती है अभावों को
निराशा किस बात की
आशा नहीं किसी सौगात की
बस जिंदगी यूँ ही चलती है
भाव और अभाव के बीच
किसे अपना कहूँ ,किसे कहूँ पराया
कभी अपनों ने दर्द दिया परायों ने सहलाया
कभी परायों ने दिया ,तो अपनों ने बहलाया
जिंदगी इन उल्टे सीधे ,आड़े तिरछे
कदमों का जोड़ बन गयी है
मोहब्बत कोई करता नहीं
पर मोहब्बत के नाम का कितना होड़ है |
हर कोई यहाँ तलाशता अपना जोड़ है |
उन्हें कोई कहाँ मिलता
जो बनकर आए बेजोड़ हैं
वही तो जिंदगी काे रास्ता देते
वही बनाते मोड़ हैं |

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