रजिस्टर से समरी तक होता है भृष्टाचार का बड़ा खेल-UPHG

कानपुर। सूबे के मुखिया UPHG विभाग में हो रही धांधली के खिलाफ लगातार सख्ती बरत रहे है। परंतु उन्ही के चहेते कुछ जिला कमाण्डेड अपनी करनी में कोई परिवर्तन नही ला रहे है। और लगातार पुरानी व्यवस्था पर ही अपने कारनामो को अंजाम दे रहे है। गौतम बुद्ध नगर में खुले घोटाले की परत के बाद पूरे प्रदेश के सभी जिलों में UPHG विभाग में जांच के आदेश दे दिए थे। जिसकी जांच कानपुर नगर में भी चल रही है। और जिला कमाण्डेड अपनी पकड़ और पहचान के दम उस जांच को भी विधिवत निपटवाने में लगे है। ताकि किसी भी विभागीय व्यक्तित्व पर जांच का कोई असर न पड़े। और लगातार UPHG विभाग में भृष्टाचार फलता और फूलता रहे।

ड्यूटी रजिस्टर से समरी तक पहुंचने में होता है खेल

UPHG विभाग की कामर्सियल ड्यूटी में लगे होमगार्ड जवानों की रोजाना हाजिरी के लिए एक रजिस्टर बना होता है। जिस पर सभी जवान ड्यूटी पर आने के बाद अपने हस्ताक्षर करते है। और जिस दिन नही आते है, इंचार्ज उस पर अनुपस्थिति लगा देता है। और माह के अंत मे ड्यूटी रजिस्टर देख कर सभी जवानों के वेतन भुगतान के लिए एक समरी बनती है। जिस पर जवान का नाम, माह भर के ड्यूटी दिवस की संख्या, कुल बना वेतन, बैंक खाता संख्या आदि डिटेल दिया होता है। अब इस मे ही इंचार्ज द्वारा बड़ा खेल किया जाता है। अगर ड्यूटी पर पचास जवान लगे है, तो समरी में 70 जवानों का भुगतान कर दिया जाता है। जिसे इंचार्ज अपने हिसाब से रजिस्टर एवम समरी में बना देता है। जबकि मौके पर संख्या कम ही रहती है।

UPHG घोटाला मे बन्द कमरे की जांच में हो रहा है खेल

विभागीय होमगार्ड जवानों का कहना है कि जांच में खानापूर्ति करके सूबे के मुखिया की आंख में धूल झोंकने का काम किया जा रहा है। जिस जांच में थाने और कामर्सियल क्षेत्रों में जाकर जांच होनी चाहिए। विभागीय खेल के बारे में UPHG जवानों से जानकारी करनी चाहिए। थाना और कामर्सियल ड्यूटी के पुराने रजिस्टर चेक होने चाहिए, उस जांच को बंद कमरे में किया जा रहा है। और जिन लोगो पर आरोप है, उन्ही की सरपरस्ती में जांच को निष्पक्ष और बिना प्रभाव के संपन्न होने में संशय हो रहा है। खैर जांचकर्ता अधिकारी, होमगार्ड के विभागीय दबाव में नही आएंगे, ऐसा भी कई जवानों ने कहा है।

लखनऊ ड्यूटी की जांच हो, तो खुल सकता है भृष्टाचार

पिछले कई वर्षों में कानपुर से लखनऊ जाकर UPHG जवानों ने ड्यूटी की है। मिली जानकारी अनुसार पहले लगभग 500 होमगार्ड जवानों की ड्यूटी कानपुर से जाकर लखनऊ में लगती थी। जिसमे बताया जाता है कि चहेते होमगार्ड माह भर में एक या दो दिन ही जाते थे। और पूरे महीने का बंदरबांट हुआ वेतन उठाते थे। वही ये भी जानकारी मिली कि लखनऊ ड्यूटी में ज्यादा से ज्यादा ऐसे ही चहेते होमगार्ड जवान लगाए जाते थे। बताया जा रहा है कि 500 की संख्या में लगभग 200 जवान ही रोजाना ड्यूटी करने जाता था। और पूरे माह का वेतन बिना किस अनुपस्थिति के 500 जवानों का ही बनता था। और ऐसे चहेते जवानों के खाते में आया हुआ पैसा निकलवाकर सभी को निर्धारित हिस्सा समय से पहुंच जाता था। अगर लखनऊ जाने वाले होमगार्ड जवानों का पुराना लेखा और जोखा जांच किया जाय, तो सारे खेल उजागर हो जाएंगे। परन्तु होमगार्ड जवानों की आपसी चर्चा के अनुसार जांच में चल रही सुगबुगाहट से लगता है कि होमगार्ड विभाग के अधिकारियों ने जांच और जांच अधिकारी को मैनेज कर लिया है। और बेखौफ होकर पुराने ढर्रे पर चलते जा रहे है, उन्हें जांच के नाम पर कोई भय नही है। वहीं ये भी माना जा रहा है कि भय न होने कारण है कि शायद कोई कमिया ही न हो। परन्तु कंपनी कमांडर और कामर्सियल ड्यूटी के इंचार्जों की दिन दूनी और रात चौगुनी बढ़ती हुई सम्पत्ति चिल्ला चिल्ला कर ये बयाँ कर रही है, कि UPHG विभाग मे कहीं न कहीं कोई भृष्टाचारी खेल जरूर है।

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