डर लगता है !

kranti news , Krishna Tawakya Singh :- किससे ,किसको ,क्यों ?
यह कोई नहीं पूछता |
यह एक कहावत सी बन गई है कि आजकल डर लगता है | डर किससे लगता है? क्यों लगता है ?
यह बात जब राहुल बजाज ऐसे जाने माने उद्योगपति कहते हैं तो चर्चा होनी स्वाभाविक है |
और वर्तमान सरकार में डर लगता है पूर्व की सरकार अच्छी थी इसलिए डर नहीं लगता था |
बात में कितनी सच्चाई है यह तो राहुल बजाज को पता सहोगा | लेकिन उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए था कि क्यों लगता है ?
डर से बड़े आहत हैं राहुल बजाज ||
राहुल बजाज ने कभी यह जानने की कोशिश की कि उनके दफ्तर के कर्मचारी उनसे क्यों डरते हैं ?
तमाम तरह के बड़े लोग अपने मातहतों को क्यों डराकर रखते हैं |
क्या उनके यहाँ काम करनेवाले लोग अपनी आवाज उठा सकते हैं ? स्पष्ट है नहीं | वहाँ डर नहीं दिखता उन्हें |
तमाम तरह की बातें होंगी तो इन जैसे बड़े लोगों की एक ही उक्ति होती है जो सही है वह क्यों डरेगा ,डरते हैं गलत करनेवाले |
एक गरीब मजदूर ,कर्मचारी तो बेरोजगार होने से डरता है ,भूख से डरता है | आपके सामने बोलने की हिमाकत करेगा तो निकाला जाएगा | पर आपको किस बात का डर है ? निस्संदेह इसका उत्तर आसान नहीं होगा |
क्या आपकी तमाम तरह की मनमानियों पर प्रतिबंध लग गया है |
या व्यवसायिक वातावरण बदल गया है | या आप उतना छुपा नहीं पा रहे जितनी पिछली सरकारों में छुपा ले जाते थे |
सवाल का उत्तर देना पड़ेगा | अगर उनका डर प्रमाणिक है |
और अगर एक दबाब बनाने की कोशिश है सरकार के ऊपर तो इसे बयानबाजी से ज्यादा समझना एक भूल होगी |
मंदी का शोर है और जी़.डी.पी. घट रही है ,सरकार पर दबाब है | ऐसे समय में राहुल बजाज की यह बात कुछ अलग ही ईशारा करती है | एक उद्योगपति होने के नाते
वे जी.डी.पी.ग्रोथ रेट में कमी के कारण बताते तो लगता उनकी चिंता सही है ,पर इस तरह की बातें करके राहुल बजाज ने खुद को कटघरे में खड़ा कर लिया है |

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