प्रेम की इतनी ललक क्यों है

क्रान्ति न्यूज के लिए कृष्ण तवाक्या सिंह :- प्रेम हर व्यक्ति की प्यास क्यों है | प्रेमी जब प्रेयसी को एक नजर देखता है तो वह आह्लादित होता है | प्रेयसी को लगता है मुझमें कुछ है ,मुझमें सौंदर्य है | उसे स्वयं के अस्तित्व का बोध होता है पहली बार | जब प्रेमी प्रेयसी की तारीफ करता है तो उसे स्वयं से परिचय होता है | उसी प्रकार जब प्रेयसी प्रेम भरी निगाहों से प्रेमी को देखती है, और जब उसकी बातों पर खिलखिलाकर हँसती है, तो उसे भी स्वयं के अन्दर सौंदर्य का बोध होता है और खुश हो जाता है | पहले पहले दोनों का ध्यान एक दूसरे पर होता है और स्वयं को दूसरों की नजर से पहचानते हैं | अपना चेहरा देखने के लिए एक दूसरे का आईना बन जाते हैं और अपने अस्तित्व को एक दूसरे की आँखों में देखते हैं | प्रेमी जब प्रेयसी को छूता है तो उसको शरीर के सौन्दर्य का बोध होता है | उसकी बातों की सराहना करता है तो मन का | जब प्रेमी और प्रेयसी स्वयं को प्रेम करने लग जाते हैं तो प्रेम पूर्ण हो जाता है और अब दूसरे की आवश्यकता नहीं रह जाती | प्रेम का उद्देश्य पूरा हो जाता है जब व्यक्ति स्वयं को प्रेम करने लगता है | अब उसे दूसरा माध्यम नहीं चाहिए स्वयं को जानने के लिए | और वह आत्मसाक्ष्त्कार कर पाता है और अात्मग्यान को उपलब्ध हो जाता है | पूरी प्रक्रिया का एक ही मकसद है आपको स्वयं से प्यार हो जाए | इसके लिए प्रेम सुगम मार्ग है और मार्ग हैं पर न तो उतने आनंददायक हैं और न ही सरल | योग ,तपस्या सब स्वयं से परिचय करवाने का ही मार्ग है ,पर प्रेम सबसे सबसे प्राकृतिक और आनंददायक मार्ग |

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