यह देश चलता है सिर्फ जय श्री राम के नाम से

क्रांति न्यूज ( कवि अनिरुद्ध कुमार सिंह के द्वारा)………
गाजियाबाद ( उत्तर प्रदेश) विगत दिनांक 6/12/2019 को नवयुग मार्केट स्थित डॉ भीमराव अम्बेडकर पार्क में डां भीमराव अम्बेडकर के 64 वें परिनिरमाण दिवस के अवसर पर एक संकल्प सभा का आयोजन किया गया था, जिसमें राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष, पूर्व सांसद एवं श्री अजित सिंह चौधरी के पुत्र श्री जयंत चौधरी जी मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित थे । इसके अतिरिक्त इस मंच पर अनेक गणमान्य नेता मौजूद थे । इस मंच से क ई नेता डॉ भीमराव अम्बेडकर के प्रशंशा में तेज स्वर में जमकर ‌ भाषण दिए । सबसे अंत में इस सभा के मुख्य अतिथि श्री जयंत चौधरी जी डॉ भीमराव अम्बेडकर के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए खूब तारीफ किए । इस सभा के शुरुआत में एक गाना सुनाया जा रहा था कि – यह देश चलता है सिर्फ बाबा के संविधान से, यह देश नहीं चलता है गीता से, यह देश नहीं चलता है रामायण से,यह देश नहीं चलता है पुराण से, यह देश चलता है सिर्फ बाबा के संविधान से । मैं ‌उस सभा में कुर्सी पर दस वजे से बैठकर ‌ गाना सुन‌ रहा था । इसके बाद अन्य नेता केभाषण ‌सुने। मुझे भाषण सुनकर ऐसा लग रहा था कि ये नेता शायद कोई विश्व के सबसे बड़े -झूठे विश्वविद्यालय से स्नातक ‌पास करके आए थे, तभी तो फटाफट झुठे भाषणों के ‌पहाड़ खड़ा कर दिए । मुझे उनके भाषण में एक भी सच्चाई नजर नहीं आया ।जो नेता मंच पर यह ‌कह रहे थे कि इस देश ‌का संविधान डॉ भीमराव अम्बेडकर ने बनाया था तो वो नेता ‌दिन में ‌सपना देख रहे थे । वे यह नहीं जानते हैं कि इस देश का संविधान भारत के किसी नेता ने नहीं बनाया था । जिसे भारत का संविधान बताया जाता है,वो तो विदेशी संविधान है । भारत में विदेशी संविधान को अपनाया गया था,न कि इसे बनाया गया था । यह संविधान अमेरिका, फ्रांस,सिविटरजरलैंड, इंग्लैंड,अफिरका, आयरलैंड, और भी अन्य देशों से लिया गया था ।इसे भारत के ‌किसी नेता ने नहीं बनाया था ।जो संविधान बाहर के देशों में बना था,उसे भीमराव अम्बेडकर ने कैसे बना दिए ? क्या कोई होटल से बनी रोटी मंगाकर खाने से खाने वाले कोई रोटी के निर्माता कहलायेगा अथवा जो रोटी स्वयं बनाकर खायेंगे, वे रोटी के निर्माता कहलायेगा ? यह फैसला आप कीजिए । डॉ भीमराव अम्बेडकर कानून का एक शब्द भी नहीं लिखे थे । भारत के संविधान बाहर देश से लाए गए थे । ऐसी स्थिति में भीमराव अम्बेडकर को संविधान के निर्माता कैसे कह सकते हैं? लोकतंत्र की परिभाषा, राज्य के नीति निर्देशक तत्व, संविधान संशोधन की प्रक्रिया,समता, स्वतंत्रता एवं भाईचारे का कानून, संसदीय प्रणाली और1950 से पहले बने सभी कानून बाहरी देशों के थे, जिसे ‌अपना कहना धोखाधड़ी है । बाहरी देशों के कानून को लागू करने से भीमराव अम्बेडकर कानून के निर्माता नहीं कहला सकते हैं ।जो नेता इस प्रकार अगर वे बोलते हैं कि भारत के संविधान निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर है, तो उनसे ज्यादा मूर्ख इस दुनियां में कोई दूसरा नहीं है ।1950 के बाद भारत के अनेक कानून बदल दिए गए । भारत का राष्ट्रीय वाक्य ‘ सत्यमेव जयते’ उपनिषद से लिया गया है । भारत के राष्ट्रीय गान विश्व कवि रविंद्र नाथ टैगोर ने लिखा था । भारत का राष्ट्रीय गीत वंकिमचंदर चटर्जी ने लिखा था । डॉ भीमराव अम्बेडकर सिर्फ बाहरी देशों के कानून को संकलन किए थे । उन्होंने एक भी ‌कानून नहीं लिखा था । अगर वे अपने आप कानून लिखे होते तो उन्हें नोवेल पुरस्कार क्यों नहीं मिला ? जिस प्रकार से रविन्द्र नाथ टैगोर को स्वरचित किताब- गीतांजलि – पर नोवेल पुरस्कार मिला था । विदेशों ने भारत के संविधान को विदेशी संविधान ‌माना है, तब भारत के नेता इसे किस मुंह से जनता के सामने झुठा बात बताते हैं कि भारत के संविधान के निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर थे ? यहां के नेता बाहरी कानून को भी अपना कानून बताकर जनता को वेवकूप बना रहे हैं ।हां, एक बात सच्चा है । उन्होंने जाति पर आधारित आरक्षण व्यवस्था पर कानून बनाये थे, जो बाहरी देशों से नहीं लिया गया था । यह कानून भी भेदभाव पर आधारित था । भारत का संविधान दुनिया के सबसे घटिया संविधान है क्योंकि भारत से बाहर किसी भी देशों में जाति के आधार पर किसी को आरक्षण नहीं मिलता है । इसके साथ यह भी सच है कि भारत के बाहर योग्यता के आधार पर किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं किया जाता है । जबकि अपने देश में जो मुख्यमंत्री हैं, मंत्री हैं या ऊंचे-ऊंचे पदों पर हैं, उन्हें भी आरक्षण दिए जाते हैं । यह भी आरक्षण सिर्फ जाति के आधार पर दिए जा रहे हैं । यह कहां का न्याय है ? डॉ भीमराव अम्बेडकर से ज्यादा अच्छा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जितन राम मांझी जी हैं, जिन्होंने सबसे पहले यह कहा कि मुझे आरक्षण की कोई आवश्यकता नहीं है । परंतु आज उनका कोई नाम लेने वाला नहीं है । ऐसा क्यों? इसके अलावा यह भी सोचना चाहिए कि सिर्फ विदेशों से डिग्री लेने मात्र से कोई महान नहीं बन जाता है । क्या चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगतसिंह, लक्ष्मीबाई जैसे अनेक स्वतंत्रता सेनानी विदेश से पढ़कर आए थे ? लेकिन भीमराव अम्बेडकर ने पढ़-लिखकर क्या कर दिए ? उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में क्या योगदान दिए हैं ? उन्होंने अंग्रेजों के गुप्तचर काम करने के अलावा कौन-सा बढ़िया काम किए थे ? कुछ नेता मंच पर भाषण दे रहे थे कि बाबा के संविधान के कारण एक चाय बेचने वाला भारत के प्रधानमंत्री बन गये । अगर यह बात सच है, तब उन्हें इस प्रश्न का जवाब भी देना चाहिए कि डॉ भीमराव अम्बेडकर कानून मंत्री बने थे, लेकिन वे प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन पायें ? जगजीवन राम, काशी राम और श्री लालू प्रसाद प्रधानमंत्री कानून के कारण क्यों नहीं बन पाये? आप इस बात को ध्यान से पढ़िए- यह देश चलता है सिर्फ विदेशी संविधान से, यह नहीं चलता कांशीराम से, यह देश नहीं चलता डॉ भीमराव के नाम से, यह देश चलता है सिर्फ जय श्रीराम के नाम से ।शेष बाद में-

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