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1984 के सिख कत्लेआम के मामले में दोषी महेंद्र यादव की जमानत अर्जी खारिज हुई

  • टाइटलर और बाकी आरोपियों के खिलाफ दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी की लड़ाई जारी रहेगी: जसविंदर सिंह जॉली

नई दिल्ली 1 जुलाई (मनप्रीत सिंह खालसा):- महेंद्र यादव जो की दिल्ली में 1984 के सिख कत्लेआम के मामले में सज्जन कुमार के सह आरोपी (साथी) हैं, की जमानत अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने आज खारिज कर दी हैं ।वकील हरप्रीत सिंह होरा ने बताया की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगे की आग दिल्ली कैंट के राजनगर तक पहुंची थी। दंगे में पीड़िता जगदीश कौर के पति केहर सिंह, बेटे गुरप्रीत सिंह, केहर के चचेरे भाइयों रघुविंद्र सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह की हत्या कर दी गई थी । वहीं, एक अन्य शिकायतकर्ता निरप्रीत कौर ने शिकायत दर्ज कराई थी कि भीड़ ने उनके पिता निर्मल सिंह को जिंदा जला दिया था और गुरुद्वारे में आग लगा दी थी। 2005 में जगदीश कौर की शिकायत और न्यायमूर्ति जीटी नानावटी आयोग की सिफारिश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली कैंट मामले में सज्जन कुमार, कैप्टन भागमल, पूर्व विधायक महेंद्र यादव, गिरधारी लाल, कृष्ण खोखर और पूर्व पार्षद बलवंत खोखर के खिलाफ मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने सभी दोषियों के खिलाफ 13 जनवरी 2010 को आरोपपत्र दाखिल किया था।महेंद्र दिल्ली के पालम के पास राज नगर विस्तार क्षेत्र में सिखों की हत्या में शामिल थे। सज्जन कुमार को इस मामले में जिला अदालत ने 2013 में बरी कर दिया गया था जिसके खिलाफ सरकार द्वारा अदालत में दुबारा अपील दायर की गई थी। अन्य सह अभियुक्तों महेंद्र यादव, गिरधारी लाल, कृष्ण खोखर, बलवान खोखर और कप्तान भागमल ने भी उच्च न्यायालय में उनको मिली सजा के खिलाफ अपील दायर की थी।सज्जन कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें हाईकोर्ट ने सज्जन कुमार को दिल्ली कैंट इलाके में सिखों के कत्लेआम मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके अलावा कोर्ट ने सज्जन कुमार पर 5 लाख का जुर्माना भी लगाया था. हाईकोर्ट ने बाकी 5 दोषियों पर एक-एक लाख का जुर्माना लगाया था, जिनमें बलवान खोखर, कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल को उम्रकैद जबकि महेंद्र यादव और किशन खोखर की सजा 3 से 10 साल बढ़ा दी थी. जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस विनोद गोयल की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा था कि 1947 में विभाजन के समय हुए नरसंहार के 37 साल बाद फिर हजारों लोगों की हत्या हुई और पीएम की हत्या के बाद एक समुदाय को निशाना बनाया गया. हत्यारों को राजनीतिक संरक्षण था, तब से वे हिरासत में हैं।महेन्द्र यादव कोरोना वायरस से कथित रूप से संक्रमित हैं और एलएनजेपी अस्पताल में पुलिस की निगरानी अधीन भर्ती हैं। कोर्ट ने आज उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है।दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के  कानूनी प्रकोष्ठ के पूर्व अध्यक्ष जसविंदर सिंह जॉली ने कहा, ‘हमने दोषियों को सजा दिलाने के लिए अदालत में लंबी लड़ाई लड़ी है। अदालत ने जमानत देने से इनकार करके, सिखों के साथ न्याय किया हैं। उन्होंने कहा, “दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी 1984 के बाकी रह गए टाइटलर और अन्य दोषियों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी और हम उन्हें हर हालात में जेल भिजवा कर रहेंगे” ।

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